2 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एमपी में बनेंगे 30 नए आइपीएस! एसपी से डीजीपी रैंक तक के पदों में होगी बढ़ोत्तरी

IPS Cadre Review IN MP- आइपीएस कैडर रिव्यू: मप्र ने केंद्र से मांगे 30 नए पद, सभी उच्च रैंक पर पदों में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव
2 min read
Google source verification
IPS Cadre Review

MP IPS Cadre Review (फोटो-एआई जेनरेटेड)

IPS- मप्र में लंबे समय से लंबित आइपीएस कैडर रिव्यू की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू हो गई है। पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश में आइपीएस के करीब 30 नए पद बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा है। सरकार की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। प्रस्ताव में कुल बढ़ोतरी का करीब 33 प्रतिशत पद राज्य पुलिस सेवा से प्रमोट होने वाले अधिकारियों के लिए रखने की तैयारी है।

मध्यप्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर रिव्यू की प्रक्रिया में काफी विलंब हो चुका है। इससे राज्य पुलिस सेवा के कई अधिकारी IPS बनने से वंचित हो चुके हैं। राज्य के पुलिस अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित होने पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) भी केंद्र और राज्य सरकारों पर गुस्सा जता चुका है। CAT की जबलपुर खंडपीठ ने सख्त रुख दिखाते हुए सरकार से जवाब भी तलब किया था।

इस बार मौजूदा कैडर में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव

अभी प्रदेश में स्वीकृत संख्या 319 है। प्रस्ताव में एसपी से लेकर डीजीपी स्तर तक अलग-अलग रैंक पर पद बढ़ाने की मांग की गई है। प्रदेश में 2003 के बाद 2010 फिर 2015 और 2022 में कैडर रिव्यू हुआ था। पीएचक्यू ने इस बार मौजूदा कैडर में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है।

प्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर रिव्यू की प्रक्रिया काफी विलंब से चल रही

मध्यप्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर रिव्यू की प्रक्रिया काफी विलंब से चल रही है। इस देरी के कारण कई आवेदक तो निर्धारित आयु सीमा तक पार कर चुके हैं। राज्य के पुलिस अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए। इस पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) भी रोष जता चुका है।

कैडर रिव्यू पर केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल

CAT की जबलपुर खंडपीठ ने तीन माह पहले एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर रिव्यू पर केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। राज्य पुलिस सेवा के 3 अधिकारियों ने 56 वर्ष की आयु सीमा पार करने के बावजूद उनके भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अभ्यर्थित्व पर विचार करने की अपील की थी। उनका आरोप था कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा हर पांच वर्ष में किए जाने वाले अनिवार्य कैडर रिव्यू में गंभीर देरी की गई। कैट ने प्रथम दृष्टया मामले को आवेदकों के पक्ष में माना। 1998 बैच के इन अधिकारियों के मामले में सख्ती दिखाते हुए केंद्र व राज्य सरकार से जवाब तलब भी किया था।