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वन्यजीवों पर चिंता: बाघों के कॉरिडोर से गुजरेगी नई रेलवे लाइन, वन्यजीव बोर्ड ने दी सशर्त मंजूरी

Satpura Melghat Tiger Corridor: सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर से गुजरने वाली नई रेलवे लाइन को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है। हालांकि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कई शर्तें भी रखी गई हैं।
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भोपाल

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Saurabh Mall

Aug 02, 2026

Satpura Tiger Reserve

सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर में रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी, वन्यजीवों पर चिंता (इमेज सोर्स: ANI)

Wildlife Conservation Tiger Reserve Corridor: मध्य-भारत के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर में शामिल सतपुड़ा-मेलघाट लैंडस्केप से होकर प्रस्तावित तीसरी रेलवे लाइन को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है। हालांकि समिति ने स्पष्ट किया है कि परियोजना पर अंतिम अनुमति वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और प्रभावी सुरक्षा उपायों के बाद ही आगे बढ़ेगी।

टाइगर कॉरिडोर और ईको-सेंसिटिव जोन से गुजरेगी लाइन

बता दें यह रेलवे लाइन मध्य प्रदेश के जुझारपुर (बैतूल) से चिचोंडा (नर्मदापुरम) तक करीब 160.6 किलोमीटर लंबी होगी। यह परियोजना इटारसी-नागपुर रेल मार्ग पर प्रस्तावित तीसरी और चौथी लाइन का हिस्सा है।

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, रेलवे ट्रैक दो अधिसूचित टाइगर कॉरिडोर और सतपुड़ा-मेलघाट क्षेत्र के ईको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरेगा। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में है, जबकि मेलघाट टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र में स्थित है।

बाघों की आवाजाही के लिए जरूरी हैं कॉरिडोर

टाइगर कॉरिडोर वन्यजीवों, खासकर बाघ, तेंदुआ, स्लॉथ भालू और अन्य शाकाहारी जीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये कॉरिडोर अलग-अलग जंगलों के बीच जीवों की आवाजाही और आनुवंशिक विविधता (Genetic Flow) बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

निरीक्षण समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह वन क्षेत्र सतपुड़ा-पेंच-मेलघाट लैंडस्केप की जीवनरेखा है। इसलिए इस परियोजना का मूल्यांकन केवल वर्तमान जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि भविष्य में वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

34 वाइल्डलाइफ ओवरपास का प्रस्ताव

सेंट्रल रेलवे ने वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए रेलवे लाइन पर 34 वाइल्डलाइफ ओवरपास बनाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि निरीक्षण समिति ने कहा कि इन संरचनाओं का प्रस्ताव मुख्य रूप से वन विभाग के फील्ड स्टाफ और वन्यजीवों की मौत के रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है।

अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

‘राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड’ की बैठक में यह भी बताया गया कि परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों (Environmental Effect) और आवश्यक सुरक्षा उपायों पर व्यापक अध्ययन अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, जबलपुर को अध्ययन सौंपा गया है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

इस परियोजना के लिए कुल 206.09 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें 74.69 हेक्टेयर वन भूमि और 131.40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि शामिल है। अंतिम मंजूरी से पहले वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सुझाए गए सभी उपायों की वैज्ञानिक समीक्षा की जाएगी।