Madanlal- मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय खेल दिवस महोत्सव के दूसरे दिन महिला फुटबॉल में बेहद रोमांचक मुकाबला हुआ।
Madanlal- मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय खेल दिवस महोत्सव के दूसरे दिन महिला फुटबॉल में बेहद रोमांचक मुकाबला हुआ। भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में सरदारपुर की टीम ने मिनी ब्राजील के नाम से प्रसिद्ध शहडोल जिले के विचारपुर गांव की टीम को 1-0 से हरा दिया। राष्ट्रीय खेल दिवस से शुरू हुए प्रदेशव्यापी खेल महोत्सव के दूसरे दिन प्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने मैच की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में सुव्यवस्थित खेल अधोसंरचना और सुदृढ़ खिलाड़ियों का निर्माण की सतत प्रक्रिया का उल्लेख किया। विशेष रूप से उपस्थित क्रिकेटर मदनलाल ने खेलों में सफलता का मंत्र दिया।
महिला फुटबॉल मैच में शुरुआत से ही सरदारपुर की टीम ने दबदबा बनाए रखा। पहले हाफ में ही सरदारपुर की कप्तान और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी ज्योति चौहान ने शानदार गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद विचारपुर की टीम ने पूरे दमखम से खेला, लेकिन बराबरी का गोल करने में सफल नहीं हो सकी।
मैच में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विचारपुर की गोलकीपर उमा केवट और सरदारपुर की कप्तान ज्योति चौहान को सम्मानित किया गया। उन्हें ₹21,000 की सम्मान राशि दी गई।
इस अवसर पर पूर्व क्रिकेटर और मोटिवेशनल स्पीकर मदनलाल शर्मा, हाइपरफॉर्मेंस स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. संजना किरन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक राकेश गुप्ता, उप संचालक बीएस यादव भी उपस्थित रहे।
विशेष सत्र में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मदनलाल शर्मा ने खिलाड़ियों को समय प्रबंधन और अनुशासन का मंत्र दिया। उन्होंने कहा हर खिलाड़ी को पछताना नहीं चाहिए कि समय का बेहतर उपयोग नहीं किया। सफलता का रहस्य सकारात्मक रवैया और मेहनत है। मदनलाल ने ‘खेलो इंडिया’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल युवाओं की प्रतिभा निखारने और नए अवसर देने का सशक्त माध्यम है।
क्रिकेटर मदनलाल ने कहा कि खिलाड़ियों को यह पछतावा कभी नहीं होना चाहिए कि काश समय का सही उपयोग किया होता। मैं भी सोचता हूं कि अगर मैंने समय का और बेहतर इस्तेमाल किया होता तो और आगे बढ़ सकता था। हर खिलाड़ी को अपने समय का महत्व समझना चाहिए और रवैये को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
मदनलाल ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छा खेलना ही आपका पहला कर्तव्य है। आप सभी योग्य हैं, तभी यहां तक पहुंचे हैं। एक अच्छा कोच हमेशा खिलाड़ी को परखता है और यही प्रक्रिया उसे पेशेवर बनाती है। मदनलाल ने कहा कि दूसरों से तुलना मत कीजिए, खुद से प्रतिस्पर्धा कीजिए। यदि कोई कमी है तो खुद को दोष दीजिए। आखिरकार मायने यही रखता है कि कौन मैदान में प्रदर्शन करता है। मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी ही अंततः चैंपियन बनते हैं। उन्होंने भोपाल में खेलों को बढ़ावा मिलने पर खुशी जताई।