भोपाल

चीन से कंबोडिया तक फैला ठगी का जाल, एमपी में 7 महीने में खातों से 5 करोड़ पार

Cyber Fraud : प्रदेश में साइबर क्राइम के लगातार बढ़ते मामलों के बीच क्राइम ब्रांच की जांच में खुलासा हुआ है। केंद्रीय साइबर पोर्ट पर आई शिकायतों से नेटवर्क सामने आया।
2 min read
Cyber Fraud
Cyber Fraud (चीन से कंबोडिया तक फैला ठगी का जाल Photo Source- Patrika)

Bhopal News : साइबर पुलिस के कमाम प्रयासों के बावजूद मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के नए नए मामले हर रोज सामने आते रहते हैं। वहीं, राजधानी भोपाल सहित प्रदेश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों के पीछे अब विदेशी नेटवर्क की बड़ी भूमिका सामने आई है। क्राइम ब्रांच की जांच में खुलासा हुआ है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, लोन, केबीसी लॉटरी और मैट्रिमोनियल फ्रॉड जैसी साइबर ठगी की वारदातों में 11 देशों के सर्वर का इस्तेमाल किया जा रहा है। साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि 30 प्रतिशत मामलों के मुख्य आरोपी विदेशों से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।

बता दें, प्रदेश में पिछले सात माह पहले साइबर ठगी के मामले में ई जीरो एफआइआर की शुरुआत हुई है और इस दौरान विदेशी सर्वरों से करीब 5 करोड़ रुपए की ठगी के मामले सामने आए हैं। सर्वर से छिपाते हैं पहचान: जांच में सामने आया कि जालसाज अलग- अलग तरह की ठगी के लिए अलग- अलग देशों के सर्वर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस वजह से जांच करने वाली टीमों को अपराधियों तक पहुंचना चुनौती से कम नहीं होता है। इस तरह के साइबर अपराधी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और विदेशी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर अपनी पहचान छिपा देते हैं।

इन देशों के सर्वर का इस्तेमाल

क्राइम ब्रांच के अनुसार, फर्जी निवेश और ऑनलाइन लोन के नाम पर होने वाली ठगी में सबसे अधिक चीन, हांगकांग और इंडोनेशिया के सर्वरों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराधम काकर रकम वसूलने वाले गिरोह कंबोडिया, फिलीपींस और थाईलैंड से संचालित सर्वर का इस्तेमाल कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, चीन और हांगकांग से कैश बस, लाइटनिंग कैश, इजीलोन जैसी साइटों से जालसाजी की जाती है, जबकि नाइजीरिया से 419 स्कैमर्स जैसी साइटों से धोखाधड़ी के जाल में फंसाया जाता है।

नाइजीरिया और कंबोडिया से जुड़े तार

इसी तरह मैट्रिमोनियल वेबसाइट और सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर शादी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों का लिंक नाइजीरिया और कंबोडिया से जुड़ा मिला है। वहीं केबीसी लॉटरी, रिश्तेदार की गिरफ्तारी या सरकारी एजेंसी बनकर डराने वाले मामलों में पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े डिजिटल नेटवर्क की जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है।

इस तरह की ठगी में भारत का सर्वर

देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले ठग केवाइसी अपडेट, बिजली बिल, पानी का बिल , क्रेडिटडेबिट कार्ड अपडेट और सेक्सटॉर्शन जैसे साइबर ठगी का का नेटवर्क चला रहे हैं।

ई-जीरो केस का आंकड़ा

10 नवंबर 2025 से जून 2026

-टोटल ई-जीरो केस: 279
-रजीस्टर्ड केस: 240
-फ्रॉड राशि: 14 करोड़ 86 लाख 2025 तक
-शिकायतें: 1,197
-गिरफ्तार आरोपी: 124
-फ्रॉड राशि: 32.48 करोड़
-फ्रिज राशि: 14.16 करोड़
-रिफांड: 3. 51 करोड़

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

साइबर एक्सपर्ट शोभित चतुर्वेदी का कहना है कि, अपराधियों की तकनीक लगातार बदल रही है। वे विदेशी सर्वर, वीपीएन और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अपनी लोकेशन छिपा लेते हैं। ऐसे मामलों में जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और विभिन्न देशों से तकनीकी सहयोग की जरूरत पड़ती है, जिससे कार्रवाई में समय लग सकता है।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुके साइबर अपराध

साइबर क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह का कहना है कि, विदेशी सर्वर्स के बढ़ते इस्तेमाल ने साफ कर दिया कि साइबर अपराध अब अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुके हैं। डिजिटल सतर्कता ही बचने का तरीका है।

Updated on:
22 Jul 2026 11:15 am
Published on:
22 Jul 2026 11:13 am