
Bhopal news: साइबर ठगों ने अलग-अलग तरीकों से तीन लोगों को अपना शिकार बनाकर 2.60 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली। ठगों ने होटल बुकिंग के नाम पर डेबिट कार्ड पिन और ओटीपी हासिल किए, मोबाइल बंद होने का फायदा उठाकर खाते से रकम ट्रांसफर कर दी। वहीं एक अन्य मामले में परिचित बताकर 90 हजार रुपए ठग लिए। तीनों मामलों में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चुनाभट्टी निवासी शैलेष सक्सेना 29 अगस्त को भोपाल के एनराइज सायाजी होटल में कमरा बुक करने ऑनलाइन जानकारी तलाश रहे थे। गूगल पर होटल सर्च करने के दौरान उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला। कॉल करने पर आरोपी ने खुद को होटल का कर्मचारी बताया और वॉट्सऐप पर कमरों की फोटो व जानकारी भेजी। आरोपी ने ऑनलाइन बुकिंग के लिए डेबिट कार्ड से भुगतान करने को कहा। शैलेष ने कार्ड की जानकारी दे दी। इसके बाद आरोपी ने 10,400 रुपए के ट्रांजेक्शन के नाम पर ओटीपी मांगा। ओटीपी देने के बाद जीएसटी जुड़ने की बात कहकर दोबारा ओटीपी लिया। तीसरी बार ओटीपी मांगने पर शैलेष को शक हुआ। कार्ड ब्लॉक कराया, लेकिन तब तक तीन ट्रांजेक्शन में 72,190 रुपए निकल चुके थे।
मोबाइल बंद, खाते से 98 हजार गायब
बैरागढ़ चिचली निवासी मनीष यादव स्कूल वैन चलाते हैं। 29 अगस्त को हॉलीक्रॉस स्कूल पहुंचे थे। इसी दौरान उनका मोबाइल ऑटो अपडेट होने लगा और फोन बंद हो गया। फोन चालू करने के बाद उन्हें केनरा बैंक खाते से 98 हजार रुपए डेबिट होने का मैसेज मिला। बैंक स्टेटमेंट और फोनपे हिस्ट्री देखने पर रकम रितिक कुमार की यूपीआई आइडी में ट्रांसफर होना सामने आया। पुलिस को इसका यूटीआर नंबर भी दिया गया है।
आरिफ नगर निवासी फराज खान ने पुलिस को बताया कि एक व्यक्ति ने खुद को परिचित बताकर बातचीत की और झांसे में लेकर 90 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
साइबर ठगों ने इस बार क्रिप्टो करंसी में निवेश के नाम पर झांसा देकर इंजीनियर को 12 लाख रुपए की चपत लगा दी। मामला बागसेवनिया थाना इलाके का है। पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, गुलाबी नगर निवासी सत्येंद्र करोसिया आइटी कंपनी में इंजीनियर हैं। उन्हें कुछ समय पहले अज्ञात मोबाइल से फोन आया और बिजनेस बढाने का झांसा दिया गया। इसके बाद उन्हें टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ लिया गया था।
मामले में मोबाइल धारक ने उन्हें झांसा दिया गया है कि वह अगर क्रिप्टो करंसी में निवेश करेंगे, तो उन्हें अच्छा मुनाफा हो गया। लालच में आकर इंजीनियर ने अलग-अलग किस्तों के माध्यम से करीब 12 लाख रुपए निवेश कर दिए थे। रकम जमा करने के बाद उन्हें न तो मुनाफा मिला और न ही पैसे वापस मिले। साथ ही आरोपियों ने फोन उठाना भी बंद कर दिया था। परेशान फरियादी ने साइबर सेल में लिखित में आवेदन दिया।