
MP News : मानसून के आने से पहले मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने जमीनी के साथ तकनीकी स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभाग ने गुजरात के भास्कराचार्य संस्थान द्वारा इंसीडेंट रिपोर्ट सिस्टम तैयार करवाया है। इससे अब सड़क दुर्घटना, सड़क धंसने, पुल क्षतिग्रस्त या अन्य किसी घटनाओं की जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगी।
विभाग के मंत्री तक पहुंचने वाले अलर्ट सिस्टम गुजरात से तैयार कराया इंसीडेंट रिपोर्ट सिस्टम, पूरे प्रदेश में होगा लागू से इनके सुधार या जांच संबंधित एक्शन में तेजी आएगी। किसी समस्या के समाधान के लिए फाइल टेबल-टेबल भी नहीं भटकेगी। विभाग का यह इंटरनल ऐप बनकर तैयार है, जो 15 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
इंसीटेंड रिपोर्ट सिस्टम एक मोबाइल ऐप है। इसमें घटना का फोटो अपलोड करते ही लोकेशन खुद दर्ज हो जाएगी। घटनाक्रम की तकनीकी रिपोर्ट भी इसी में अपलोड होगी। जिसके बाद समस्या का जिस स्तर पर निदान होना है उसके पास खुद मैसेज चला जाएगा। जिॠमेदार अफसर और विभाग के मंत्री रियल टाइम मॉनिटरिंग भी कर सकेंगे।
इस संबंध में मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह का कहना है कि, कई बार सड़क धंसने, ब्रिज में कोई खामी या अन्य कोई समस्या है तो जानकारियां उच्च अधिकारियों तक समय से नहीं पहुंचती थीं। विभाग को मीडिया रिपोर्ट से जानकारी मिलती थी। इसलिए ऐसा सिस्टम तैयार करवाया गया है, जिसमें सूचनाएं तेजी से ट्रांसफर हों। इससे तुरंत राहत, मरॠमत और अन्य आवश्यक कार्रवाई शुरू हो सकेगी।
इंसीडेंट रिपोर्ट सिस्टम एप के जरिए किसी घटना का विवरण दर्ज करना शामिल है। जैसे कि, सैफ्टी इंसीडेंट, , प्रॉपर्टी का नुकसान, बाल-बाल बचना या सुरक्षा संबंधी अवलोकन और आगे की कार्रवाई के लिए नामित संपर्क व्यक्ति को एप के माध्यम से प्रस्तुत करना है। इस प्रक्रिया से उन जोखिमों, विफलताओं और खतरों की पहचान त्वरित हो सकती है, जिनके कारण घटना घटी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुधार लागू किए जा सकते हैं। ऐसे में आगे की प्रक्रिया में आमतौर पर सुधारात्मक कार्रवाई, जांच, खतरे की रिपोर्ट और समीक्षा शामिल होती है
इंसीडेंट रिपोर्ट सिस्टम ऐप के इस्तेमाल से मॉनिटरिंग करने वाला जिमम्मेदार वास्तविक समय में घटित होने वाली सभी तरह की घटनाओं की रिपोर्ट कर सकते हैं, जिससे आपको कार्यस्थल की गहन जानकारी, घटना के मूल कारण का विश्लेषण में बदलाव लागू करने में मदद मिलती है।