
Datia by Election MP UP Politics: दतिया उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। इस सीट पर होने वाले उप चुनाव की जीत-हार अकेले मध्यप्रदेश के राजनीतिक माहौल पर ही असर नहीं डालेगी, बल्कि उत्तरप्रदेश के मध्यप्रदेश से सटे झांसी, ललितपुर, जालौन, उरई और मऊरानीपुर जैसे कई इलाकों में भी इसका असर पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अगले साल 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव है, जिसके लिए अभी से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत समूची भाजपा ताल ठोंक रही है तो मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव भी पीछे नहीं है। उधर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी मैदान में है।
राजनीतिक विश्लेषकों (Datia by Election by Political Experts) का मानना है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में मुख्यमंत्री और जीतू पटवारी, दोनों को परफॉर्मेंस दिखाने के लिए लगभग प्रर्याप्त समय मिल चुका है। आगे परीक्षा की घड़ी है। साल 2028 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा आगे भी काबिज रहना चाहेगी, तो कांग्रेस वापसी के लिए जोर लगा रही है। दोनों ही दलों को जिताऊ चेहरे चाहिए होंगे। माना जा रहा है कि इस चुनाव में दोनों ही दल अपने नेताओं को कसौटी पर परखेंगे।
झांसी:दतिया की सीमा से सटा सबसे बड़ा और मुख्य शहर है, जिसकी दूरी अलग-अलग मार्गो से 35 किलोमीटर के दायरे में है। इसे बुंदेलखंड का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। दोनों ही शहरों के कई लोगों का राजनीति के क्षेत्र में अच्छा रूझान रहा है।
ललितपुर: दतिया से करीब 115 किमी दूर है, जो कि यूपी का एक प्रमुख जिला है जो दतिया संभाग के काफी करीब है।
जालौन: यह दतिया से करीब 103 किमी की दूरी पर है। जिसमें भाजपा, सपा का अच्छा दबदबा है।
उरई: जालौन जिले का प्रशासनिक मुख्यालय और प्रमुख शहर, दतिया से लगभग 131 किमी की दूरी पर है।
फिलहाल मध्यप्रदेश (Datia by Election future of bjp congress leaders) में जिस तरह का माहौल है, उस अनुरूप दतिया में होने वाला यह विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की राजनीति लाइन भी तय करने वाला हो सकता है।
विधानसभा चुनाव 2023 के बाद से मध्यप्रदेश में तीन सीटों पर उप चुनाव हो चुके हैं। इनमें विजयपुर, बुधनी और अमरवाड़ा शामिल है। भाजपा ने बुधनी और अमरवाड़ा में तो कांग्रेस ने विजयपुर में जीत दर्ज कराई है।
-भाजपा ने बहुमत न होते हुए भी हाल में राज्यसभा सीट जीती है। ऐसे में जनता के बीच में जाकर उप चुनाव हारे तो आरोप लगेंगे कि लोग भाजपा को नकार रहे हैं। कांग्रेस आरोप लगाएगी कि छल-कपट से चुनाव जीतने वालों को मैदान में जनता नकार देती है, जीत दर्ज कराकर भाजपा ऐसे आरोपों से बचाना चाहेगी।
- विजयपुर उप चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है, दूसरी सीट पर हारना मतलब सत्ता व संगठन के लिए खतरे की घंटी जैसा होगा, इसलिए किसी भी कीमत पर जीत के प्रयास होंगे।
- ढाई साल बाद 2028 में विधानसभा चुनाव है, उसके पहले यह संभवत यह अंतिम उप चुनाव होगा, हार मिली तो कांग्रेस इसे भुनाएगी, सत्ता व संगठन के प्रयास होंगे कि ऐसा मौका न दिया जाए।
- अगले ही साल स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं, स्थानीय सरकारों में भी दखल जरूरी है, इस लिहाज से भी यह चुनाव जीतने के प्रयास होंगे।
-कांग्रेस के परफॉर्मेंस से कहीं न कहीं खाटी कांग्रेसी मायूस हैं। दिल्ली को भी शिकायतें सुननी पड़ रही हैं। कांग्रेस इस चुनाव को जीतकर सभी आरोपों से पीछा छुड़वाने और कांग्रेस में जान फूंकने के प्रयास होंगे।
- हर बार नेतृत्व पर सवाल उठते हैं, गुटबाजी के आरोप आम बात हो गई है। जीतू पटवारी और उनकी टीम यह चुनाव जीतकर सभी का जवाब देने चाहेगी।
- कांग्रेस शुरू से राजेंद्र भारती को भाजपा द्वारा सताया हुआ बताती रही है, स्वभाविक है कि उप चुनाव में जीत दर्ज कराकर यह बताने का प्रयास करे कि चालबाजी का जनता ने जवाब दिया है।
- मध्यप्रदेश में अगले साल स्थानीय निकाय चुनाव और यूपी में विधानसभा चुनाव होने है। कांग्रेस उक्त चुनाव को जीतकर भाजपा को आइना दिखाने का प्रयास करेगी।