
Bhopal news: मध्यप्रदेश में कम बारिश के चलते इस बार रबी सीजन में सिंचाई के पानी को लेकर संकट गहराने लगा है। जलाशयों में सीमित जलभराव को देखते हुए कुछ जिलों ने सिंचाई के पानी पर पाबंदी और कटौती का फैसला किया है। रतलाम में 50 फीसदी से कम पानी वाले बांधों से सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जाएगा। वहीं, 50 से 75 फीसदी तक भरे जलाशयों से सीमित पानी मिलेगा। 75 फीसदी से अधिक और पूरी क्षमता से भरे बांधों से पलेवा के बाद दो से तीन बार ही फसलों की सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा।
दूसरी ओर, प्रदेश के करीब 75 फीसदी जिलों में अब तक जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक नहीं हुई है। ऐसे में यह तय नहीं हो पाया है कि किस बांध से कब और कितना पानी छोड़ा जाएगा। किसान इस बार समय से पहले बोवनी करना चाहते हैं और हर साल के मुकाबले जल्दी नहरें खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग का मैदानी अमला निर्णय के अभाव में पानी छोड़ने से बच रहा है। सिर्फ 9 जिले ही आगामी योजना तय कर सके हैं।
रतलामः जिन तालाबों में 503 फीसदी से कम पानी है उनसे सिंचाई नहीं होगी। इसमें मध्यम सिंचाई परियोजना धोलावाड़ भी शामिल है। 20 तालाबों से पलेवा के साथ एक पानी सिंचाई के लिए दिया जाएगा। 23 बैराज से पलेवा के साथ 3 पानी मिलेगा।
नर्मदापुरमः हरदा जिले के लिए तवा बांध की बायी तट मुख्य नहर से 25 अक्टूबर, 27 को सिवनी मालवा की रायगढ़ भिलाडिया मकड़ाई के लिए और 1 नवंबर से मिसरोद उप नहर, इटारसी संभाग की नहरें व 5 नवंबर से सोहागपुर को पानी दिया जाएगा।
टीकमगढ़ः 10 नंबर से पानी छोड़ेगे, जिन फसलों को कम पानी की जरुरत होती है, किसानों को उनकी बुवाई के लिए प्रेरित किया जा रहा।
छिंदवाड़ा: 15 नवंबर से पानी मिलेगा। एक पलेवा में 15 दिन ही नहरें खुलेंगी। 100% भरे बांधों से 1 पलेवा-3 पानी, 75% से 1 पलेवा -2 पानी, 50-75% तक से 1-1 पलेवा-पानी और 50% से कम से सिर्फ एक पलेवा पानी मिलेगा।
विदिशाः शत-प्रतिशत भरे बांधों से एक पलेवा के अलावा सिंचाई के लिए दो बार पानी मिलेगा। 50% भरे बांधों से एक पलेवा और एक सिंचाई का पानी मिलेगा। 25% से कम भराव वाले बांधों से केवल पेयजल के लिए पानी ले सकेंगे।
कम बारिश के चलते इस साल मालवा-निमाड़ के साथ ही बुंदेलखंड के जिलों में स्थिति चिंताजनक है। ग्वालियर-चंबल अंचल में बीते साल की तुलना में जल उपलब्धता कम है, जबकि महाकौशल के कई जिलों में औसत बारिश के बावजूद जलस्रोतों की स्थिति बेहतर नहीं है। प्रदेश के 12 जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर अब नदियों, कुओं और दूसरे जलस्रोतों में दिखाई देने लगा है।
प्रदेश में अब तक श्योपुर, कटनी, रतलाम, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बैतूल, विदिशा, ग्वालियर और टीकमगढ़ में जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक हो चुकी है। शेष जिलों में बैठक और निर्णय का इंतजार है। ऐसे में किसानों के सामने बोवनी का समय और सिंचाई के पानी की उपलब्धता के बीच तालमेल बैठाने की चुनौती है। यदि जल्द निर्णय नहीं हुए तो नहरों से पानी मिलने में देरी रबी की बोवनी को प्रभावित कर सकती है।