शरीर में फॉलेट की कमी से हो जाते हैं ये 5 रोग, स्थितियां बिगड़ने से पहले जान लें इसके स्रोत
भोपाल/ फॉलिक एसिड को ही मेडिकल भाषा में फॉलेट कहा जाता है। ये विटामिन बी का ही एक टाइप होता है। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फॉलेट का संतुलित होना बेहद जरूरी होता है। शरीर में फॉलेट की कमी होने से व्यक्ति एनीमिया (खून की कमी) का शिकार हो सकता है। क्योंकि फॉलिक एसिड ही हमारे शरीर में रेड ब्लड सेल्स को बनाने में मदद करता है। इसके अलावा डीएनए को बनाने और उसे रिपेयर करने का काम भी इसी का होता है। फॉलिक एसिड ब्रेन, नर्वस सिस्टम और रीढ़ की हड्डी में तरल पदार्थों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तो आइये जानते हैं, कि शरीर में फॉलेट की कमी आने से क्या खतरे हो सकते हैं और किन आहारों की मददसे हम फॉलेट नियंत्रित रख सकते हैं।
फॉलेट की कमी के ये है कारण
फॉलेट या फॉलिक एसिड विटामिन बी-9 के दूसरे नाम हैं। पानी में घुलनशील ये विटामिन बी-9 शरीर को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पानी में घुल जाने के कारण शरीर इसे स्टोर करके नहीं रख पाता है। फॉलेट को नियंत्रित रखने के लिए शरीर को रोजाना फॉलिक एसिड युक्त आहारों की जरूरत होती है। क्योंकि, शरीर इसे सेल्स में स्टोर नहीं कर पाता है। आमतौर पर शरीर में फॉलेट की कमी इसलिए होती है-
-अल्कोहल का अधिक सेवन भी फॉलेट की कमी का कारण बनता है।
फॉलेट के कमी होने पर दिखने लगते हैं ये लक्षण
-घबराहट और चिड़चिड़ापन होना
फॉलेट नियंत्रित रखने के स्रोत
फॉलिक एसिड सप्लीमेंट्स के अलावा उन विभिन्न तरह के व्यंजनों को अपने आहार में शामिल करें ताकि इसकी पूरी मात्रा मिल सकें। इन खाद्य पदार्थों में अन्य पोषक तत्व भी हैं जो आपको और आपके बच्चे के लिए ज़रूरी हैं। फॉलिक एसिड के प्रमुख प्राकृति स्रोतों में हरी पत्तेदार सब्जियां, फलियां, बीज, अंडा, अनाज और खट्टे फल शामिल है। हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक, शलजम का साग, अजमोद और शतावरी शामिल है। दाल, बींस और फलियां में पिंटो सेम, काले सेम, राजमा और किडनी बींस शामिल है। इसके अलावा फूलगोभी, ब्रोकली, पपीता और स्ट्रॉबेरी भी फोलिक एसिड का स्रोत है।