MP News: गार्जियन ट्यूटर छात्रों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और प्रदर्शन का विश्लेषण करेगा, साथ ही कमजोर छात्रों की पहचान कर उन्हें मार्गदर्शन देगा।
MP News: छात्रों का तनाव दूर करने कॉलेजों में गार्जियन ट्यूटर की व्यवस्था की जाएगी। जो छात्रों पर निगरानी रखेंगे और उन्हें मार्गदर्शन भी देंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कॉलजों को आदेश जारी कर दिए हैं और तत्काल क्रियान्वयन की रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद जारी किए गए हैं। जिसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे। विभाग ने स्पष्ट किया, 25 से 40 विद्यार्थियों पर एक गार्जियन ट्यूटर नियुक्त करना होगा।
गार्जियन ट्यूटर छात्रों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और प्रदर्शन का विश्लेषण करेगा, साथ ही कमजोर छात्रों की पहचान कर उन्हें मार्गदर्शन देगा। यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से मनोविज्ञान के प्रोफेसरों को सौंपी जाएगी और जिन कॉलेजों में मनोविज्ञान का विभाग नहीं होगा, वहां बाहर से गार्जियन ट्यूटर की नियुक्ति की जाएगी।
छात्रों की व्यक्तिगत समस्याओं और मानसिक तनाव को समझना भी ट्यूटर की जिम्मेदारी होगी। जरूरत पडऩे पर उन्हें काउंसलर से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा अभिभावकों से नियमित संपर्क बनाए रखना, छात्र की प्रगति की जानकारी देना और अनुशासन पर नजर रखना भी ट्यूटर के दायित्व में शामिल है। कॅरियर मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरणा और व्यक्तित्व विकास जैसे पहलुओं पर भी गार्जियन ट्यूटर विशेष ध्यान देंगे। छात्रों को एनएसएस, एनसीसी, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
हर छात्र की व्यक्तिगत फाइल तैयार की जाएगी और काउंसलिंग की जानकारी दर्ज होगी। विभाग ने साफ किया, व्यवस्था छात्रों के बेहतर भविष्य व संतुलित जीवन के लिए जरूरी कदम है।
हमारे कॉलेज में पहले से ही सोशलॉजिस्ट (काउंसलर) की व्यवस्था है, जो छात्रों की समस्याओं का निराकरण करते हैं। उच्च शिक्षा विभाग के आदेशानुसार इसमें शामिल अन्य बिंदुओं का भी पालन किया जाएगा। यह छात्रों की मानसिक समस्या को हल करने में काफी मददगार साबित होगी। डॉ. संजय जैन, प्राचार्य, बाबूलाल गौर भेल कॉलेज
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा के संबंध में बड़ा बदलाव किया है। एमपी बोर्ड के लाखों छात्रों के हित में इसे बड़ा कदम बताया जा रहा है। एमपी बोर्ड ने दशकों से चली आ रही पारंपरिक पूरक परीक्षा यानी सप्लीमेंट्री एग्जाम प्रणाली को पूरी तरह से खत्म करने का फैसला लिया है। इसके बदले द्वितीय परीक्षा आयोजित की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत अब सिर्फ फेल हुए छात्र ही नहीं, बल्कि वो छात्र भी पास हो सकेंगे, जो एक प्रकार से अपने रिजल्ट के पर्सेंटेज में सुधार करेंगे और जो अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं है। खास बात ये है कि, छात्र किसी भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। नए पैटर्न से छात्रों को अपने रिजल्ट को सुधारने का बेहतर मौका मिलेगा।