MP News: पुलिस जांच में सामने आया है कि शुरुआत में अंकिता को इस बात का अहसास नहीं था कि वह किस काम में शामिल हो रही है। उसे बताया गया कि यह सिर्फ सामान पहुंचाने का काम है, जिससे जल्दी पैसे मिलेंगे।
MP News: "मां, घर जल्दी लौटूंगी… पढ़-लिखकर कुछ बनना है।" रायसेन निवासी 19 वर्षीय अंकिता (बदला हुआ नाम) जब घर से निकली थी, तो उसके कंधे पर टंगा बैग सिर्फ किताबों का नहीं, बल्कि सपनों का भी था। लेकिन कुछ ही महीनों में वही बैग उसके लिए बोझ बन गया। इस बार उसमें किताबें नहीं, बल्कि गांजे की खेप थी। मजबूरी, नादानी या लालच, अपराध के इस दलदल ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। जिस परिवार ने उसकी पढ़ाई पूरी कर कॅरियर की राह पर आगे बढ़ते देखने का सपना देखा था, आज वही परिवार अपनी बेटी को जेल से बाहर निकालने के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहा है।
यह सिर्फ अंकिता की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी कई लड़कियां हैं जो गुमराह हो रही हैं। पढ़ाई, नौकरी या बेहतर जिंदगी की तलाश में शहर आते ही वे ऐसे तत्वों के निशाने पर आ जाती हैं, जो उन्हें सुनहरे सपने दिखाकर नशे के कारोबार में धकेल देते हैं। क्राइम ब्रांच में दर्ज नशा तस्करी के मामलों में 44 ऐसे प्रकरण हैं, जिनमें महिलाएं आरोपी हैं। इनमें कई छात्राएं भी शामिल हैं। इन्हीं मामलों में अंकिता और आरोही (बदला हुआ नाम) वर्तमान में जेल में बंद हैं।
पढ़ाई के लिए भोपाल आई अंकिता की मुलाकात रीवा की रहने वाली आरोही से हुई। नए शहर में दोनों एक-दूसरे का सहारा बन गईं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा और दोनों साथ रहने लगीं। लेकिन कुछ महीनों बाद हालात बदलने लगे। आरोही पहले से ही एक नशा तस्करी नेटवर्क के संपर्क में थी। पहले अंकिता को सिर्फ साथ चलने के लिए कहा गया, फिर एक दिन उसे एक बैग पकड़ाया गया और धीरे-धीरे वही बैग उसकी जिम्मेदारी बन गया। इस तरह वह अनजाने में इस नेटवर्क का हिस्सा बनती चली गई।
पुलिस जांच में सामने आया है कि शुरुआत में अंकिता को इस बात का अहसास नहीं था कि वह किस काम में शामिल हो रही है। उसे बताया गया कि यह सिर्फ सामान पहुंचाने का काम है, जिससे जल्दी पैसे मिलेंगे। धीरे-धीरे सच्चाई सामने आई और वह गांजा तस्करी की पैडलर बन गई। कम समय में अधिक पैसे कमाने का लालच, नए शहर में सहारे की जरूरत और परिवार की आर्थिक स्थिति ने उसे पीछे हटने का मौका नहीं दिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन एक अपराधी द्वारा जेल से किया जा रहा था। वह अपने साथियों के माध्यम से बाहर युवतियों को जोड़ता था। पहले दोस्ती करता, फिर भरोसा जीतकर उन्हें इस नेटवर्क में शामिल कर लेता था।
पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में 100 से अधिक महिलाओं और युवतियों को नशा तस्करी के मामलों में गिरफ्तार किया गया है। सिर्फ क्राइम ब्रांच ने ही 44 से ज्यादा महिलाओं को पकड़ा है। इनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच है। इनमें छात्राएं, घरेलू महिलाएं और काम की तलाश में शहर आई युवतियां शामिल हैं।
नशे के खिलाफ अभियान के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। गिरोह में शामिल सभी आरोपियों को पकडऩे के प्रयास जारी हैं और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। क्राइम ब्रांच की टीम अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो पर्दे के पीछे से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। - संजय कुमार, पुलिस कमिश्नर, भोपाल
भोपाल से सुमित यादव की रिपोर्ट ……