भोपाल

जमीन की गहराई में दुर्वागती की एंट्री, ‘भोपाल मेट्रो’ अंडरग्राउंड लाइन ने पकड़ी रफ्तार

Bhopal Metro: मेट्रो की अंडरग्राउंड लाइन के लिए विधिवत खुदाई शुरू, भोपाल रेलवे स्ठेशन के पास 24 मीटर गहराई में उतरी मशीन दुर्गावती...

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Mar 31, 2026
Bhopal Metro Underline Project Work Start durgavati Machine deep into 24 meter in the Ground(photo:patrika)

Bhopal Metro: मेट्रो की अंडरग्राउंड लाइन के लिए सोमवार से विधिवत खुदाई शुरू हो गई। खुदाई के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन के पास टनल बोरिंग मशीन को 24 मीटर गहराई में उतारा गया। इसे दुर्गावती नाम दिया गया है। बीते करीब दस दिन से ये मशीन यहां स्थापित की जा रही थी। इसकी टेस्टिंग भी की गई। पांच मीटर तक खुदाई की गई। इसके बाद अब औपचारिक तौर पर इसे शुरू किया गया। एमडी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन एस कृष्ण चैतन्य ने कहा, प्रोजेक्ट की प्रगति को बनाए रखते हुए सभी काम तय समय में पूरे किए जाएंगे।

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इमारतों को बचाने ऐसे होगा काम

- टीबीएम अब करीब 265 मीटर लंबा स्लोप बनाएगी और आगे बढ़ेगी।

- खुदाई के दौरान कंपनी इसे तकनीकी भाषा में पिक पार्टिकल वेलोसिटी कहते हैं, उसकी नियमित मॉनीटरिंग होगी।

- पहली मशीन 50 मीटर तक सुरंग बना लेगी, उसके बाद दूसरी टीबीएम लॉन्च करेंगे।

- जमीन के 20 मीटर गहराई में वेंटिलेशन के लिए बड़े पंखों का उपयोग होगा।

3.35 किमी बनेगी अंडरग्राउंड लाइन

भोपाल मेट्रो की करोंद से एम्स तक 16 किमी लंबी लाइन में 3.39 किमी लंबी अंडरग्राउंड लाइन व दो अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनेंगे। इसके लिए अलग से 750 करोड़ रुपए से काम दिया गया है। ये अंडरग्राउंड लाइन ट्वीन टनल आधारित रहेगी। यानी आवाजाही के लिए अलग- अलग सुरंग रहेगी। इसके लिए जमीन से 24 मीटर गहराई तक खुदाई की जा रही है। अंडरग्राउंड लाइन पुल बोगदा के बाद ऐशबाग से शुरू होकर करोद से पहले ङ्क्षसधी कॉलोनी तक रहेगी।

दो जगह से अप्रैल में शुरू होगा काम

प्रोजेक्ट के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन के पास मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए काम शुरू किया था, अब ऐशबाग व सिंधी कॉलोनी की ओर से भी काम शुरू किया जाएगा। इसी तरह अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए नादरा बस स्टैंड के पास भी खुदाई होगी। दोनों स्टेशन 180-180 मीटर लंबे होंगे। पूरे प्रोजेक्ट में तीन टीबीएम मशीन का उपयोग किया जाएगा। गौरतलब है कि ये मशीन एक बार टनल में फंसने के बाद निकाली नहीं जा सकती। टनल बनाने के लिए इसके कुछ पार्ट जरूर निकाल लिए जाते हैं।

जल्द ही उतारी जाएगी टीबीएम अहिल्याबाई

अफसरों के मुताबिक दुर्गावती की एट्री फर्स्ट ट्रायल था, जो सफल रहा है। वहीं अब जल्द ही टीबीएम अहिल्याबाई को भी जमीन के नीचे उतारा जाएगा। इन दोनों मशीनों को ये ऐतिहासिक नाम इसलिए दिए गए हैं, ताकि स्थानीय लोग अपनी भावनाओं के साथ प्रदेश की विरासत से जोड़ सकें। लोगों को इससे अपनापन महसूस हो।

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Published on:
31 Mar 2026 10:30 am
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