
Census 2027(photo:patrika)
Census 2027: जनगणना 2027 (Census 2027) की तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है और काम जमीनी स्तर तक पहुंच चुका है। जिले में मास्टर ट्रेनर्स के बाद 129 फील्ड ट्रेनर्स की ट्रेनिंग पूरी कर ली गई है। अब ये फील्ड ट्रेनर्स अगले चरण में करीब 9 हजार प्रगणकों (एन्यूमरेटर) को प्रशिक्षित करेंगे। प्रगणकों का प्रशिक्षण शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में आयोजित किया जाएगा। यहां तीन-तीन दिन के अलग-अलग सत्रों में ट्रेनिंग दी जाएगी। पहले चरण में नगर निगम और शहरी क्षेत्रों के प्रगणकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में ग्रामीण और अन्य क्षेत्रों के प्रगणकों को शामिल किया जाएगा। फील्ड ट्रेनर्स से प्रशिक्षित प्रगणक सुनिश्चित करेंगे कि हर घर तक सही जानकारी पहुंचे। जिले में मकानों की नंबरिंग का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। हर घर को एरिया के अनुसार नंबर दिए गए हैं, जिससे मकानों की पहचान आसान होगी।
इस बार जनगणना डिजिटल सिस्टम (Census 2027) पर होगी, जिसे लेकर प्रशासन तैयारी कर रहा है। प्रगणकों को टैबलेट और मोबाइल एप के जरिए घर-घर जाकर डेटा दर्ज करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण में उन्हें डेटा कलेक्शन के आधुनिक तरीके, ऑनलाइन एंट्री सिस्टम, डिजिटल उपकरणों के उपयोग और सर्वे के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी कम होगी और आंकड़ों का विश्लेषण तेजी से हो सकेगा।
जनगणना प्रक्रिया के तहत अप्रैल से सितंबर के बीच मकान सूचीकरण का काम किया जाएगा। इसके लिए हर राज्य अपनी 30 दिनों की अवधि तय करेगा। इस दौरान मकानों की संख्या, संरचना और उपयोग से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाएगा। सबसे पहले मकानों की मैपिंग होगी, इसके बाद पूरे क्षेत्र को छोटे-छोटे गणना ब्लॉक्स में बांटा जाएगा। हर वार्ड में करीब 15 से 20 गणना ब्लॉक्स बनाए जाएंगे। हर ब्लॉक की निगरानी के लिए अलग अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। इसके बाद गणनाकर्ता और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी। मकान सूचीकरण के बाद दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी। इसके लिए गांव और शहरों को समान आकार के ब्लॉक्स में बांटा जाएगा और हर ब्लॉक के लिए एक-एक गणनाकर्ता नियुक्त होगा।
बता दें कि जनगणना 2027 का पहला चरण बुधवार 1 अप्रैल से शुरू होगा। जनगणना पूरी तरह से हाईटेक होगी। मकानों की गिनती में जियो रेफरेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा। हर घर की लोकेशन डिजिटल मैप पर दर्ज होगी। इसका बड़ा फायदा ये होगा कि कोई घर नहीं छूटेगा और न ही उसका नंबर दोबारा आने की गलती होगी।
Published on:
31 Mar 2026 09:52 am
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