कोरोना काल में भी की जबर्दस्त कमाई
हितेश शर्मा भोपाल. कोरोना के कारण कई लोग बेरोजगार बैठे हैं. ऐसे में आनलाइन रेस्त्रां चलानेवाली तनुश्री ने लोगों को कमाई के तरीके बताते हुए उन्हें प्रेरित किया है. जानिए उन्हीं की मुंहजुबानी— मैं तनुश्री शाहपुरा में रहती हूं। कोरोना काल में पति संजीव दास सेलरी कम हुई और बाद में नौकरी पर बन आई। मैंने एमबीए किया है, तो कुछ करने की सोचने लगी।
२०२० जून में होम किचन शुरू किया। रेस्त्रां में मैंने खुद खाना कभी नहीं बनाया, हमारे शेफ ही खाना बनाते थे, लेकिन मुझे खाना बनाने और सलीके से परोसने का शौक था। इसलिए नई डिशेज सीखी और शेफ बन गई। व्हाट्स ऐप ग्रुप से कॉलोनी, परिचितों और रेस्त्रां के पुराने कस्टमर्स को जोड़ा। मेरा ऑनलाइन रेस्त्रां चल रहा है, आज मैं हर महीने लगभग ५० हजार रुपए कमा रही हूं।
मीडिया बना मददगार
इस बिजनेस को सेटल करने में सोशल मीडिया काफी हद तक मददगार साबित हुआ। क्योंकि संक्रमण के इस दौर में आप सीधे लोगों तक नहीं पहुंच सकते। खुद को अपडेट किया। मैंने डिशेेज बनाना भी ऑनलाइन सीखा और ऑर्डर भी ऑनलाइन ही ले रही हूं। व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाया तो फेसबुक पर पेज बनाया और उस पर अपना खास मेन्यू डाला। मैं पहले खाना नहीं बनाती थी, लेकिन जब खाना बनाना सीखा तो दोस्तों को मेरे हाथों से बने बंगाली डिशेज का स्वाद बहुत अच्छा लगा।
पहले दिन सिर्फ ३ ऑर्डर मिले
मुझे लगा कि इसी हुनर को बिजनेस बनाना चाहिए। मैंने घर में उपलब्ध सामग्री से ही खाना बनाना शुरू किया। बड़े बर्तन खरीदने के लिए ५ हजार खर्च किए और ऑनलाइन रेस्त्रां शुरू हो गया। मैं हर तरह की डिशेज के लिए ऑर्गेनिक आइटम्स का ही उपयोग करती हूं। ग्राहक कोरोना महामारी के इस दौर में मेरी बनी डिसेज खाकर सेफ और हेल्दी फील करते हैं। यही मेरे बिजनेस की ताकत है। मुझे पहले दिन सिर्फ ३ ऑर्डर मिले थे, लेकिन आज २० से अधिक ऑर्डर मिल रहे हैं।
रोज आठ घंटे करती हूं काम
अपने बिजनेस के लिए मैं रोज घर में आठ घंटे खाना बनाने और उसे पैक करने का काम करती हूं। कुछ लोग तो खुद ही अपना खाना ले जाते हैं कुछ को डिलेवरी मेरे पति दे आते हैं। ऑनलाइन ऐप्स के माध्यम से जो बुकिंग मिलती है उनके डिलेवरी बॉय खाना ले जाते हैं। वीकेंड पर तो रात-12 बजे तक काम चलता है। पति संजीव दास भी इस काम में मेरी मदद करते हैं।