
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के मतदान में अब सिर्फ 6 महीने ऐसे में सूबे की शिवराज सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल में बढ़ोतरी का झटका दिया है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी अब बिजली बिलों में लगने वाले एनर्जी और फिक्स चार्ज पर पांच फीसदी सरचार्ज वसूली की जाएगी। सरचार्ज की नई व्यवस्था बीते 24 अप्रैल से लागू कर दी गई है। हालांकि, अभी सिर्फ इस व्यवस्था को 24 मई तक के लिए ही लागू किया गया है। खास बात ये है कि, प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब बिजली कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी लिए बिना ही कोई चार्ज बढ़ाया है।
मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी 24 मई के बाद उत्पादन खर्च की समीक्षा कर नए सिरे से सरचार्ज का फीसद सुनिश्चित करेगी। हालांकि, राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार है, जब बिजली कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग से मंजूरी लिए बिना ही कोई चार्ज बढ़ाया हो। नए प्रावधानों के अनुसार, पावर मैनेजमेंट कंपनी अब हर महीने ये सरचार्ज तय करेगी। अभी पांच फीसद सरचार्ज लागू किया गया है। इसे फरवरी में के उत्पादन खर्च की समीक्षा के बाद तय किया गया है। मई में कितना सरचार्ज लगेगा, इसका निर्धारण मार्च में हुए खर्च से तय होगा।
इस तरह होता है निर्धानरण
इससे पहले हर तिमाही में फ्यूल कॉस्ट एडजेस्टमेंट (एफसीए) नियामक आयोग तय करता था। इससे साल में चार बार एफसीए बिलों में जुड़ता था। इस जनवरी 2023 से मार्च तक के लिए 34 पैसे प्रति यूनिट किया गया था, यानी सालभर में 34 पैसे प्रति यूनिट बिजली महंगी हुई है। लेकिन, अब अब एफसीए के स्थान पर फ्यूल एंड पावर पर्चेस एडजेस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) है। इससे पहले महीने अप्रैल - मई में ही बिजली 36 पैसे (200 यूनिट तक) प्रति यूनिट तक महंगी कर दी है। खास बात ये है कि, ये सरचार्ज हर स्लैब में बदकर बिल में आने वाले एनर्जी और फिक्स चार्ज का 5 फीसद वसूला जाएगा।
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