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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से फिर सुर्खियों में आए एमपी के पूर्व मंत्री, 16 महिलाओं की शिकायतों पर गंवाना पड़ा पद

Dharmendra Pradhan Resignation- पीएम नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से एमजे अकबर को देना पड़ा था इस्तीफा, MP कोटे से बने थे राज्यसभा के सांसद
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MJ Akbar in the headlines following Dharmendra Pradhan resignation

एमजे अकबर-

Dharmendra Pradhan: नीट पेपर लीक मामले में जंतर मंतर पर सीजेपी के आंदोलन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पीएम नरेंद्र मोदी के अब तब के 12 साल के कार्यकाल में वे केवल दूसरे ऐसे मंत्री हैं जिन्हें किसी विवाद के कारण अपना पद गंवाना पड़ा। शनिवार को जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की खबर आई, देशभर में पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर भी एकाएक सुर्खियों में आ गए। दरअसल वे मोदी केबिनेट के पहले ऐसे मंत्री थे जिन्होंने विवाद के बाद अपना इस्तीफा दिया था। एमजे अकबर देश के शीर्षस्थ संपादक और पत्रकार रहे थे। मंत्री बनने के बाद जब देश-दुनिया में मी टू आंदोलन चला तो कई महिलाओं ने उनपर भी गंभीर आरोप लगाए। इस पर एमजे अकबर को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। तब वे एमपी से राज्यसभा सांसद थे।

NEET पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर में युवाओं के लगातार जारी प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजा।

धर्मेंद्र प्रधान, बीजेपी की नरेंद्र मोदी सरकार के ऐसे केवल दूसरे मंत्री हैं जो किसी विवाद पर अपने पद से हटे। इससे पहले
पीएम नरेंद्र मोदी की केबिनेट में रहे एमजे अकबर को मी टू आंदोलन में महिलाओं से शारीरिक शोषण के आरोपों के बाद मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। यह घटना सन 2018 में हुई थी।

एमजे अकबर, देश के मीडिया जगत की एक बड़ी हस्ती थे। सन 1989 में वे राजनीति में उतरे और कांग्रेस मेें आ गए। करीब ढाई दशक तक कांग्रेसी रहे एमजे अकबर ने 2014 में बीजेपी ज्वाइन कर ली। लोकसभा चुनावों में अभूतपूर्व विजय के बाद केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए। इसके बाद एमजे अकबर को मध्यप्रदेश के कोटे से राज्यसभा में लाकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। 5 जुलाई 2016 को उन्हें विदेश राज्यमंत्री के रूप में अहम दायित्व दिया गया।

मध्यप्रदेश के राज्यसभा सांसद और विदेश राज्यमंत्री के रूप में एमजे अकबर का कामकाज चल रहा था तभी ‘मी टू' आंदोलन शुरु हो गया। वे भी इसकी चपेट में आ गए। करीब 16 महिलाओं, युवतियों ने एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाए। इससे वे विपक्ष के निशाने पर आ गए।

यौन शोषण के सभी आरोपों को खारिज कर इन्हें निराधार बताया

एमजे अकबर ने महिलाओं से यौन शोषण के सभी आरोपों को खारिज कर इन्हें निराधार बताया। कोर्ट में जाने की भी धमकी दी। हालांकि विवाद बढ़ता गया ​और इसके बाद अंतत: एमजे अकबर को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जाना पडा। उन्होंने 17 अक्टूबर 2018 को विदेश राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मीटू के आरोपों से बचने के लिए बाद में एमजे अकबर ने कोर्ट की शरण ली। खुद पर लगे यौन शौषण के आरोपों के खिलाफ उन्होंने याचिका लगाई।

प्रमुख बिंदु

पीएम नरेंद्र मोदी के पहले टर्म में मंत्री थे एमजे अकबर
महिलाओं के आरोपों पर गंवाना पड़ा था पद
एमजे अकबर पर लगा था यौन शोषण का आरोप
16 महिलाओं ने की थी शिकायत
मोदी मंत्रिमंडल से देना पड़ा था इस्तीफा
विदेश राज्य मंत्री थे एमजे अकबर
बीजेपी में आने से पहले कांग्रेस में थे