
Justice Ujjal Bhuyan on Ganga river Biryani case गंगा नदी बिरयानी केस पर जस्टिस भुइयां की टिप्पणी (source: patrika)
Ganga River Biryani Case: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने चिंता जताते हुए कहा कि छात्रों को सिर्फ विरोध प्रदर्शन के लिए जेल भेजा जा रहा है। साथ ही गंगा नदी पर नाव में इफ्तार मामले में कहा कि गंगा नदी पर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है। ये बातें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने भोपाल के नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में जस्टिस GP सिंह की चौथी मेमोरियल लेक्चर में कही।
ऐसे मामलों को लेकर जस्टिस भुइयां ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अपनी राय जाहिर करने और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने का अधिकार नागरिकों की बुनियादी आजादी है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने शनिवार को कहा कि "गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है।" उन्होंने व्रत तोड़ने के दौरान चिकन बिरयानी खाने के लिए युवाओं की गिरफ्तारी की आलोचना की। उन्होंने कहा, "मुझे यकीन है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। यह अपराध हो ही नहीं सकता। उन्हें इसी वजह से गिरफ्तार किया गया और उन्हें तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा।"
जस्टिस उज्जवल भुइयां ने कहा कि अदालतें जमानत के लिए ऐसी शर्तें लगा रही हैं जो असल में व्यक्ति को असहमति जाहिर करने से रोकती हैं। गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी करने वाले युवाओं के समूह को जमानत न दिए जाने पर भी जस्टिस भुइयां ने सवाल किया कि ऐसी चीज के लिए जमानत से इनकार किया जा सकता है, जो कोई अपराध ही नहीं है। मैं खुद से पूछता हूं कि क्या ऐसी गतिविधि के लिए लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है और 3 माह तक जमानत देने से इनकार किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले का ज़िक्र करते हुए जिसमें सजा के तौर पर अपनाए जाने वाले 'बुलडोज़र जस्टिस' को गलत ठहराया गया था, जस्टिस भुइयां ने कहा कि यह फ़ैसला स्वागत योग्य तो है, लेकिन "दो साल की देरी" से आया है। उन्होंने उन मामलों का भी ज़िक्र किया जिनमें ज़मानत पाने वाले आरोपियों को सार्वजनिक सभाओं में शामिल होने या सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोका गया था; उन्होंने कहा कि ऐसी शर्तें "उनकी बुनियादी आज़ादी और स्वतंत्रता को बुरी तरह कमज़ोर करती हैं"।
Updated on:
26 Jul 2026 10:10 am
Published on:
26 Jul 2026 10:10 am
