भोपाल

पिता दे रहे कब्जेदारों को नोटिस, बेटी कब्जे बचाने की करेगी पैरवी, भोपाल में डैम के आसपास 96 अवैध निर्माण

Bhopal Municipal Corporation: कलियासोत डैम अतिक्रमण मामले में नगर निगम अधिकारी नीरज लिखार ने नोटिस दिए, उनकी बेटी अक्षरा इंटरवीनर बनकर रसूखदारों की रक्षा में उतर गईं।
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Updated: 30 Oct 2026, 8:01 AM IST
कलियासोत डैम के आसपास अतिक्रमण, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
कलियासोत डैम के आसपास अतिक्रमण, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: एमपी के भोपाल शहर में एनजीटी में चल रहे कलियासोत डैम के आसपास अतिक्रमण के मामले में दिलचस्प कहानी सामने आई है। एनजीटी के निर्देश पर हाई प्रोफाइल अतिक्रमणकारियों को कब्जे हटाने के लिए भोपाल नगर निगम भोपाल के मुख्य नगर निवेशक नीरज आनंद लिखार और उनके अधीनस्थ नोटिस दे रहे हैं। अब इन्हीं मामलों में लिखार की बेटी एडवोकेट अक्षरा लिखार ने इंटरवीनर बनकर एंट्री ले ली है। उन्होंने मामले में 8 नए पक्षकार भी जुड़वा लिए हैं। वे उन रसूखदारों को बचाने के लिए केस लड़ेगी, जिन्हें उनके पिता ने नोटिस दिए हैं। नीरज लिखार मामले में नगर निगम की तरफ से ओआइसी भी हैं। यानी ट्रिब्यूनल की सुनवाई में भी पिता-पुत्री आमने-सामने होंगे। इन पर हितों के टकराव की आशंका जताते हुए याचिकाकर्ता आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।

दरअसल, एनजीटी सेंट्रल जोन बेंच में 2022 डॉ. सुभाष सी पांडे ने याचिका लगाई थी। इसमें कलियासोत और केरवा डैम के आसपास के फुल टैंक लेवल, ग्रीन बेल्ट, बॉटनिकल गार्डन, रीजनल पार्क के लिए आरक्षित क्षेत्र में अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माण, वाणिज्यिक गतिविधियों का मुद्दा उठाया। एनजीटी ने निर्देश पर डॉ. पांडे ने अतिक्रमणकारियों के नाम, खसरा नंबर, फोटो आदि समेत पूरा विवेश पेश किया। इनमें कई रसूखदार नेता, अफसर और अन्य बिजनेसमैन शामिल हैं। एनजीटी के निर्देश पर निगम ने मुख्य नगर निवेशक नीरज आनंद लिखार को प्रकरण में ओआइसी बनाया गया। उन्होंने पक्षकारों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस थमाए।

इंटरवीनर ने बढ़वाए पक्षकार, लेकिन जानकारियां गलत

अधिवक्ता अक्षरा लिखार ने एनजीटी के समक्ष इंटरवीनर के तौर पर जो आवेदन दिया उसमें कुछ और नए पक्षकार जोड़े हैं। डॉ. पांडे के मूल आवेदन में 9 पक्षकार थे। एनजीटी के निर्देश पर डॉ. पांडे ने 9 और पक्षकार जोड़े थे। इस तरह पक्षकारों की संख्या 18 हो गई। लेकिन 30 सितंबर के आदेश द्वारा ट्रिब्यूनल ने इंटरवीनर का आवेदन स्वीकार कर निर्देश दिया कि उसमें दर्ज 8 और प्रतिवादी जोड़े। इसके साथ इन प्रतिवादियों को दो सप्ताह में जवाब और आपत्तियां दाखिल करने की अनुमति दी गई। लेकिन इंटरवीनर ने जो आवेदन दिया था, उसकी जांच में कई पक्षकारों के खसरा नंबर ही गलत है। एक ही खसरा नंबर दो पक्षकारों के सामने अलग-अलग गांवों में लिख दिया गया। इसके साथ खसरा दस्तावेज, स्थल के फोटो, विवादित व्यवसायिक संपत्तियों के कब्जे की प्रकृति या सीमा का भी प्रमाण नहीं दिया। नए पक्षकारों के पते भी उनके घर के दिए गए। विवादित संपत्ति के नहीं दिए। याचिकाकर्ता ने इसकी जांच की मांग की है।

लापरवाही के लिए नीरज लिखार को 2023 में मिल चुका नोटिस

नि गम के मुख्य नगर निवेशक नीरज आनंद लिखार को वर्ष 2023 में इसी मामले की सुनवाई के दौरान उपिस्थत नहीं होने और लापरवाही करने के लिए नगरीय विकास विभाग के उपसचिव ने कारण बताओ नोटिस दिया था। इसमें प्रकरण में जानबूझकर लापरवाही और कर्तव्य की अवहेलना के लिए दो वेतनवृद्धियां रोकने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

(मामले में नीरज आनंद लिखार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।)

कलियासोत में 96 अवैध निर्माण चिह्नित, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई

एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर कुल 96 अवैध निर्माण चिह्नित किए हैं। इनमें से 84 अवैध निर्माण सरकारी भूमि पर और 12 निजी भूमि पर पाए गए हैं। इनमें 58 घर बने हुए हैं और सात धार्मिक स्थल भी हैं। इसके बाद राजस्व, नगर निगम एवं ग्रामीण विकास विभाग के सक्षम अधिकारियों अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस जारी किए हैं। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकांश लोग कोर्ट से स्टे ले आए या मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में किसी पर भी कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

Updated on:
30 Oct 2026, 8:01 AM IST
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