
Fathers Day : आज के दौर में जब हर कोई सिर्फ खुद के बारे में ही सोच रहा है तो कुछ ऐसे उदाहरण भी जिन्होंने पूरा जीवन दूसरों के लिए गुजार दिया। ऐसा ही एक उदाहरण मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाले सरदार खान भी हैं। वैसे तो सरदार खान की खुद की कोई संतान नहीं है, लेकिन 300 से ज्यादा बच्चों के लिए ये पिता की भूमिका निभा रहे हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन पिछले 39 साल में सरदार खान ने कई बच्चों की बेहतर परवरिश कर उन्हें उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाकर डॉक्टर और इंजीनियर तक बनाया है। प्रदेश में अपनी तरह की मिसाल के रूप में सामने आए हैं। राजधानी में बेसहारा बच्चों के लिए इन्होंने सहारा दिया है।
सरदार खान ने अपने इस पिता तुल्य सेवा कार्य की शुरुआत 39 साल पहले की थी। ऐसे में अबतक 310 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें इन्होंने अच्छी परवरिश देने के साथ साथ अच्छी से अच्छी पढ़ाई कराने तक की जिम्मेदारी निभाई। इन्होंने बच्चों के पढ़ाने के साथ उन्हें स्किल सिखाने की शुरुआत की।
शहर के कोहेफिजा पर बने ट्रेनिंग सेंटर में बच्चों ने पढ़ने के साथ उन कामों को सीखा जो उन्हें अपने पैरों पर खड़ा लायक बना सकते थे। उन्हें राज्य स्तर पर सम्मान मिल चुके हैं। वर्तमान में सरदार खान 30 बच्चों की परवरिश कर, उन्हें अलग अलग हुनर की सीख दे रहे हैं।
पहली कक्षा से लेकर ग्रेजुएशन तक बच्चों की तालीम का जिम्मा लिया है। मदद का जरिया अपने सोर्स और कुछ लोग बने। अभी आधुनिक विधाओं की भी शुरुआत कर रहे हैं। शहर में कई लोग हैं जो इस दिशा में काम कर रहे हैं। सरदार खान बताते हैं इस काम के लिए एक समय में उन्हें अपना मकान भी गिरवी रखना पड़ा था।
हमारे अपने भले ही हमसे दूर हो गए हों, लेकिन 'पापा' (सरदार खान) ने हमें कभी अनाथ महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने हमें पढ़ना - लिखना सिखाया, हुनरमंद बनाया और अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया। वह हमारे लिए भगवान के समान हैं।
सरदार खान के मुताबिक, अगर किसी जरूरतमंद की मदद करना है तो उसे कोई हुनर सिखा दो। उसके बाद वह खुद अपनी मदद के लायक बन जाएंगे। उन्होंने बताया कि, ये सीख उन्हें उनके पिता जिया हुसैन खान से मिली है। वे हवलदार थे। एक बार का किस्सा सुनाते हुए सरदार ने कहा कि, 'घर की एक दुकान भी थी। मैं उसी दुकान पर बैठा करता था। एक बार की बात है.. दुकान पर एक हट्टा - कट्टा भिखारी आया, जिसे मैने मदद के तौर पर 5 रुपए दे दिए। इसी बीच पिता जिया हुसैन खान वहां पहुंच गए। पिता ने भीख मांगने वाले शख्स की अच्छा खासी हालत देखकर मुझे फटकार लगाई और फिर नसीहत की कि, अगर जिंदगी में किसी का भला करना चाहते हो तो उसे कोई हुनर सिखाओ। इस तरह पैसे देकर तो तुमने इस हट्टे - कट्टे शख्स को सही में अपाहिज कर दिया। क्योकि, आगे ये शख्स अपनी सेहत और समझ का इस्तेमाल ही नहीं कर सकेगा।'