
World Cerebral Palsy Day: अगर आपका बच्चा चल और बोल नहीं पा रहा है तो आपको उस पर ध्यान देने की जरूरत है। वो सेरेब्रल पाल्सी का शिकार हो सकता है। दूसरे बच्चों के लिए चलना, बोलना, हाथ-पैर चलाना और संतुलन बनाना सामान्य है। सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे बच्चों के लिए यही रोज की चुनौती है। यह ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसे पूरी तरह ठीक नहीं कर सकते, लेकिन नियमित फिजियोथेरेपी और पुनर्वास से बच्चे की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। शहर में इलाज की सुविधा एम्स और सीआरसी में ही है। एम्स के अध्ययन में सामने आया कि थेरेपी से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है, लेकिन 50 प्रतिशत का इलाज बीच में छूट रहा है।
मध्यप्रदेश में सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों का कोई अलग आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, भारत में 2.95 प्रति 1,000 बच्चों की राष्ट्रीय दर के आधार पर राज्य में ऐसे बच्चों की संभावित संख्या लगभग 31 हजार मानी जा सकती है। जब तक विशेष शिक्षा और सामाजिक स्वीकार्यता का ढांचा मजबूत नहीं होता, तब तक इन बच्चों का पुनर्वास अधूरा ही रहेगा।
सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क के विकास के दौरान हुई क्षति से होने वाली स्थायी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। इससे मांसपेशियों का नियंत्रण, शरीर का संतुलन, मुद्रा और चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ बच्चों में बोलने, सीखने, देखने-सुनने या मिर्गी जैसी समस्याएं साथ हो सकती हैं।
एम्स भोपाल के सेरेब्रल पाल्सी क्लिनिक में हर महीने 100 व सीआरसी भोपाल में करीब 120 बच्चे पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें आधे बच्चे लंबे समय तक उपचार जारी नहीं रख पाते। नियमित थेरेपी, आने-जाने का खर्च और परिवार की आर्थिक स्थिति बड़ी बाधाएं हैं। जागरूकता बढने से हर महीने आने वाले बच्चों में करीब आधे नए मरीज भी हैं।
चिकित्सकीय इलाज के बाद सबसे बड़ी चुनौती बच्चे को शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की है। सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षकों, नियमित स्पीच व फिजियोथेरेपी और दिव्यांग-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है।