भोपाल

माखनलाल विवि के पूर्व कुलपति कुठियाला समेत 20 पर केस दर्ज

कमलनाथ सरकार का बड़ा कदम, भाजपा निशाने पर  
2 min read
• •
Apr 15, 2019
Makhanlal chaturvedi national university of Journalism & communication
Makhanlal chaturvedi national university of Journalism & communication

भोपाल. भाजपा राज के समय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि में हुई अनियमितताओं को लेकर पूर्व कुलपति बीके कुठियाला पर एफआइआर दर्ज हुई है। ईओडब्ल्यू ने रविवार को कुठियाला के साथ ही 19 अन्य लोगों पर 420, 409 धारा लगाई है। इनमें भाजपा सरकार में मंत्री रहे विश्वास सारंग की बहन आरती भी शामिल है। आरोप है कि ये लोग विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं, घोटाले और फर्जी नियुक्तियों में शामिल रहे हैं।
दरअसल, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार दीपेंद्र सिंह बघेल ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर कुठियाला के कार्यकाल में हुई गड़बडिय़ों को लेकर संबंधित लोगों केखिलाफ एफआइआर दर्ज करने कहा था। यह कार्रवाई जनंसपर्क विभाग के अपर मुख्य सचिव गोपाल रेड्डी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। कमेटी की जांच में खुलासा हुआ कि प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और वित्त अधिकारी समेत 24 लोगों की नियुक्तियों में मापदंडों का पालन नहीं किया गया है। रिपोर्ट में कुठियाला के दो कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। आरोप है कि अधिकारी व कर्मचारियों ने कई तरह की गड़बडिय़ां की हैं।

इनके खिलाफ एफआइआर
पूर्व कुलपति बीके कुठियाला, डॉ. अनुराग सीठा, डॉ. पी शशिकला, डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, डॉ. अविनाश बाजपेयी, डॉ. अरुण कुमार भगत, प्रो. संजय द्विवेदी, डॉ. मोनिका वर्मा, डॉ. कंचन भाटिया, डॉ. मनोज कुमार पचारिया, डॉ. आरती सारंग, डॉ. रंजन सिंह, सुरेन्द्र पोल, डॉ. सौरभ मालवीय, सूर्य प्रकाश, प्रदीप कुमार डेहरिया, सतेन्द्र कुमार डेहरिया, गजेन्द्र सिंह अवश्या, डॉ. कपिल राज चंदोरिया और रजनी नागपाल के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है।
इन आरोपों पर दर्ज हुआ मामला
वर्ष 2010 से 2018 के बीच कुठियाला ने नियम विरुद्ध तरीके से नियुक्तियां की।
विशेष व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के लिए अनावश्यक शिक्षण केन्द्र खोले गए।
विश्वविद्यालय के पैसे से कुठियाला और उनके परिवार ने विदेश यात्राएं की।
वर्ष 2010 से 2018 के बीच कुठियाला ने 21 लाख से ज्यादा की राशि अवैधानिक तौर पर जारी की। इनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को 8 लाख, राष्ट्रीय ज्ञान संगम को 9.5 लाख, राष्ट्रीय विद्वत संगम के लिए 3 लाख, भारतीय शिक्षण मंडल नागपुर को 8 हजार और भारतीय वेब प्राइवेट लिमिटेड नागपुर को 46,607 रुपए शामिल हैं।

इ-टेंडर में एमपीएसइडीसी का ओएसडी ब्रह्मे गिरफ्तार
इ- टेंडर में छेड़छाड़ करने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रोनिक विकास निगम (एमपीएसइडीसी) के ओएसडी एनके ब्रह्मे को गिरफ्तार किया है। ब्रह्मे इ-टेंडर पोर्टल का काम 2012 से देख रहे हैं। ईओडब्ल्यू ने उनकी गिरफ्तारी ओस्मो के संचालकों के बयान के आधार पर की है। ओस्मो के संचालकों ने पूछताछ में बताया है कि ब्रह्मे पोर्टल में टेंडर क्रिएट करने का काम देखते हैं। वहां की गई सारी गड़बडिय़ां उनकी जानकारी में है। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने उन्हें गिरफ्तार किया। ब्रह्मे मूलत: पॉवर जनरेशन कंपनी में अधीक्षण यंत्री हैं। वे 2012 से एमपीएसइडीसी में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं।
सर्वर का डेटा लेने पहुंची टीम
पोर्टल में 2014 से 2018 तक कितने टेंडरों में गड़बड़ी हुई है, इसके लिए ईओडब्ल्यू ने एमपीएसइडीसी ऑफिस में सर्च की। डेटा स्कैन करने में 6 दिन लगने की संभावना है।

Published on:
15 Apr 2019 07:04 am