भोपाल

यूजीसी की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पहुंचा छात्रसंघ चुनाव का पहला विवाद

विद्यार्थी चुनाव में अपने पद की दावेदारी करते हुए भिड़ गए। प्रोफेसरों ने मामले को शांत करा दिया है।

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Oct 14, 2017
student union election in mp

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित मोतीलाल विज्ञान कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव को लेकर द्वितीय वर्ष के एक विद्यार्थी के साथ तीसरे वर्ष के कुछ विद्यार्थियों में विवाद हो गया। ये विद्यार्थी एबीवीपी और छात्र क्रांति संघ के हैं। इसकी शिकायत यूजीसी की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर रैगिंग के तौर पर की गई है। विद्यार्थी चुनाव में अपने पद की दावेदारी करते हुए भिड़ गए। प्रोफेसरों ने मामले को शांत करा दिया है।
राजधानी का एमवीएम कॉलेज छात्र राजनीति का गढ़ है। जैसे ही चुनाव की घोषणा हुई। छात्र संगठन छात्रों को अपनी तरफ खींचने के प्रयास में लग गए हैं। इसके चलते दो छात्र संगठन आपस में भिड़ गए। इसमें बीएससी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी के साथ बीएससी तीसरे वर्ष के कुछ विद्यार्थियों ने अभद्र व्यवहार किया है। यहां तक उसे अपशब्दों से अपमानित किया गया है। जूनियर ने हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा दी है।

वहीं प्राचार्य नीरज अग्निहोत्री का कहना है कि विद्यार्थियों का आपसी विवाद था, जिसे प्रोफेसरों ने शांत करा दिया है। विवाद करने वाले विद्यार्थियों की संख्या पांच थी। जबकि विवाद के दौरान करीब सौ विद्यार्थी जमा हो गए थे, जिसके कारण विवाद का बड़ा रुप दिखाई दे रहा था। जूनियर ने सीनियर को दंडित कराने के लिए हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई है। हेल्पलाइन से ईमेल आने के बाद कालेज प्रबंधन अपनी तरफ से जवाब प्रस्तुत कर रहा है।

निजी कॉलेजों में नहीं होंगे छात्र संघ चुनाव , संशोधन आदेश जारी :-
छात्रसंघ चुनाव की औपचारिक घोषणा के अगले ही दिन शुक्रवार को संशोधित आदेश भी जारी हो गया। अब तय किया गया है कि सिर्फ सरकारी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में ही छात्रसंघ चुनाव होंगे। हालांकि आदेश में यह भी कहा गया कि निजी कॉलेजों में छात्र संघ के गठन की प्रक्रिया अलग से की जाएगी। बताते हैं कि निजी कॉलेजों में बाद में मेरिट आधार पर सीआर का चयन होगा। फिर पदाधिकारियों का भी चयन हो जाएगा।

इस बार यह भी तय किया गया है कि फर्स्ट ईयर के छात्र अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। खास बात यह है कि 12वीं के बाद कितने भी साल का गेप रहा हो, नियमित छात्र चुनाव लड़ सकेंगे।

दरअसल, चुनाव 30 अक्टूबर को होंगे। उसी दिन मतगणना होगी और शाम को ही शपथ ग्रहण भी हो जाएगा। राज्य शासन ने चुनाव का औपचारिक कार्यक्रम जारी कर दिया था, लेकिन उसमें निजी कॉलेजों को भी शामिल किया गया था। अब इसमें बदलाव किया गया है। वजह यह बताई जा रही है कि पुलिस फोर्स की कमी है। हालांकि एनएसयूआई ने इस पर सवाल उठाए हैं। अध्यक्ष विपिन वानखेड़े का कहना है कि सारे कॉलेजों में चुनाव होना चाहिए। सरकार जिम्मेदारी से भाग रही है।

Published on:
14 Oct 2017 05:41 pm