
MP News :मध्य प्रदेश में चावल घोटाला सामने आया है। केंद्र के भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) से खराब चावल की आड़ में प्रसंस्कृत फोर्टीफाइड चावल बालाघाट समेत आसपास के जिलों के गोदामों से छिंदवाड़ा के एथेनॉल संयंत्रों को आवंटित कर दिया गया, लेकिन वो संयंत्रों पहुंचने के बजाय राइस मिलर्स को भेज दिया गया है। उसे वापस गोदामों में भेजकर खराब चावल एथेनॉल संयंत्र में भेजने की साजिश की गई। पोल खुली तो अब वो चावल भी गायब हो गया। बता दें कि, गायब हुए चावल की मात्रा 50 लाख क्विंटल बताई जा रही है, जिसकी बाजार कीमत 1200 से 2000 करोड़ रुपए आंकी गई है।
ज्ञात रहे कि फोर्टिफाइड चावल सरकारी राशन दुकानों से बच्चों - गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से निपटने भेजा गया था। एफसीआइ को एथेनॉल संयंत्रों को खराब और टूटा चावल भेजना था। उसकी जगह अफसरों की मिलीभगत से साबुत फोर्टिफाइड चावल भेजा गया है। जो पिछले एक महीने से गायब है।
राज्य सरकार धान खरीदकर चावल तैयार कराने मिलर्स को देती है। खेल यहीं से शुरू होता है। मिलर्स धान के बदले खराब किस्म के टूटे चावल सरकारी गोदामों में जमा कराते रहे हैं। पोल खुलने के बाद चावल की अदला-बदली का नया तरीका अपनाया। एफसीआइ गोदाम संचालकों की मिलीभगत से एथेनॉल संयंत्रों को खराब और टूटे चावल की जगह फोर्टिफाइड चावल आवंटित कर दिया। इस चावल को मिलर्स के पास ले जाना था। जमा कराने के बाद मिलर्स के पास स्टॉक टूटा और खराब चावल एथेनॉल संयंत्र को भेजकर यही फोर्टिफाइड चावल दोबारा एफसीआइ गोदाम में जमा कराना था। इससे राइस मिलर्स, एफसीआइ के अधिकारी - कर्मचारियों और एथेनॉल संयंत्र के अमले के कॉकस द्वारा 800 से 1000 रुपए प्रति क्विंटल अतिरिक्त कमाई किए जाने की तैयारी थी। लेकिन, चावल लोड ट्रकों के एथेनॉल संयंत्र के बजाय राइस मिलर्स के गोदाम पहुंचने से इसकी पोल खुल गई तो ट्रक के ट्रक गायब कर दिए गए।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि, एमपी में आज भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार और लूट का केंद्र और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। एक घोटाला खत्म नहीं होता, दूसरा सामने आ जाता है। अब एथेनॉल के नाम पर चावल घोटाला सामने आया है। 5 लाख मीट्रिक टन चावल, राइस मिलर्स, एथेनॉल माफिया और भाजपा सरकार के संरक्षण में भ्रष्टाचार के इस खेल का हिस्सा बना दिया गया। मिलीभगत से जनता के हक के अनाज पर डाका डाला जा रहा है।
तीन जून को बालाघाट के नवेगांव गोदाम से छिंदवाड़ा के बोरगांव स्थित एवीजे इथेनॉल संयंत्र के लिए पांच लाख मीट्रिक टन (50 लाख क्विंटल) चावल भेजा गया। शाम तक ट्रकों को छिंदवाड़ा पहुंचना था, लेकिन नहीं पहुंचे। इनमें से एक ट्रक वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल में मिला। एफसीआइ ने पुलिस की मदद ली। प्राथमिक जांच शुरू हुई तो 15 और 16 जून की रात गायब हुए दो ट्रक सिवनी जिले की नंदगोपाल मिल में मिले। तब पुलिस ने केस दर्ज किया।
पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम बना रखी है। अब तक 18 ट्रकों की जब्ती कर छह के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर चार की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस मुख्य गिरोह और उसमें शामिल लोगों का पता नहीं लगा पा रही है। आशंका है कि, मिल मालिक राज्य सरकार से मिलने वाले धान को खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।
एथेनॉल प्लांट से सस्ते में फोर्टिफाइड चावल खरीदकर उसे नए बोरों में भरकर कस्टम मिल्ड राइस के रूप में सरकारी गोदामों में जमा कर रहे थे। इस तरह वे बिना मिलिंग किए सरकार से मिलिंग शुल्क भी ले रहे थे। हालांकि, राज्य के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अफसरों ने इससे इंकार किया है।
असल में एफसीआइ राज्यों से चावल लेता है और उसे अपने ढंग व नियमों के तहत उद्योगपतियों को बेचता है। इसी आधार पर छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट से एफसीआइ ने एथेनॉल उत्पादन के लिए चावल देने का करार कर रखा था। उसी के तहत चावल की आपूर्ति की जानी थी, लेकिन चावल पुराना देना था।
-पुलिस ने ट्रक चालक दुर्गेश शेंडे, वारासिवनी मिल संचालक सौरभ संचोती और छिंदवाड़ा प्लांट प्रतिनिधि राहुल प्रताप पर केस दर्ज की जांच शुरू की।
-एसआइटी ने चौथे आरोपी प्लांट सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव पर केस दर्ज किया।
-सभी से पूछताछ के बाद सिवनी के ट्रांसपोर्टर उबेद खान, सौरभ के पिता गंभीर संचेती पर केस दर्ज।
-कुल 18 ट्रकों की जब्ती की। इनकी जांच जारी है।
-अब भी सौरभ और उसके पिता गंभीर सांचेती फरार हैं।