भोपाल

Bhopal news: पोलियो की 2 बूंद पिलाते ही अकड़ गए बच्ची के हाथ-पैर, 169 किमी. दूर लेकर भागे मम्मी-पापा

AIIMS Bhopal: तीन साल की बच्ची को पोलियो ड्रॉप पिलाने के बाद उसकी हालत बिगड़ी गई। परिवार का आरोप है कि दवा ने रिएक्शन किया है।
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Aug 06, 2026
AIIMS Bhopal: बच्ची की तबीतय बिगड़ी (Photo Source - Patrika)
AIIMS Bhopal: बच्ची की तबीतय बिगड़ी (Photo Source - Patrika)

Bhopal news: एमपी के सागर जिले में तीन वर्षीय बच्ची को पोलिया ड्रॉप पिलाते ही हालत बिगड़ने के मामले में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। बता दें की बच्ची को भोपाल एम्स में भर्ती करवाया गया है। बच्ची के मम्मी-पापा ने बच्ची को गंभीर हालत में पहले बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में दिखाया जहां से केस 169 किमी. दूर भोपाल एम्स भेजा गया। परिजनों का आरोप है कि पल्स पोलियो अभियान के दौरान पोलियो ड्रॉप पिलाने के कुछ समय बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालांकि, पोलियो की दवा और बच्ची की हालत के बीच संबंध की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार शाहपुर विकासखंड के ग्राम गिरवर निवासी हरि नारायण अग्निहोत्री की तीन वर्षीय बेटी को 29 जून को गांव के आंगनवाड़ी केंद्र में पल्स पोलियो अभियान के तहत दवा पिलाई गई थी। पिता का आरोप है कि कुछ ही देर बाद बच्ची को तेज बुखार आ गया। मुंह से लगातार लार आने लगी और हाथ-पैर अकड़ गए। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया।

एम्स की ओर से कोई बयान नहीं

बच्ची के पिता का कहना है कि एम्स भोपाल में चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि यह स्थिति पोलियो की दवा के रिएक्शन से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, एम्स की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट या बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बच्ची के उपचार, मेडिकल रिकॉर्ड और घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या थी और उसका पोलियो ड्रॉप से कोई संबंध था या नहीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पल्स पोलियो अभियान में दी जाने वाली ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) करोड़ों बच्चों को सुरक्षित रूप से दी जाती है। इस मामले में जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

Updated on:
06 Aug 2026 12:24 pm
Published on:
06 Aug 2026 12:17 pm