
MP News : सरदार सरोवर परियोजना पर हुए समझौते पर मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है। सरकार ने जहां 1500 करोड़ की बजाय अब गुजरात को 231.80 करोड़ देने की जानकारी देते हुए बड़ी रकम बचने का दावा किया है तो वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया कि, एमपी की सबसे ज्यादा जमीन गई, लोग विस्थापित हुए और उल्टे सरकार गुजरात को 550 करोड़ रुपए दे रही है। कांग्रेस ने गुजरात के सामने एमपी सरकार द्वारा घुटने टेकने के आरोप लगाए हैं।
वहीं, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा, इस परियोजना से मध्य प्रदेश को 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती रहेगी। इसके अतिरिक्त 31 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुविधा मिल रही है। कांग्रेस को इसको इसमें राजनीति नहीं करना चाहिए। वहीं, कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान मंत्री चेतन्य कश्यप ने सरकार का पक्ष रखते हुए गुजरात को 217 करोड़ रुपए देना बताया, जबकि इसके बाद सीएम ने ये राशि 231.80 करोड़ बताई। इससे भ्रम की स्थिति बन गई है।
इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि, भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में दिए गए अभिमत के अनुसार, पुनर्वास व्यय में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार, एमपी को लगभग 1,500 करोड़ रुपए का भुगतान गुजरात को करना पड़ता।
सीएम ने ये भी कहा कि, दिल्ली में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच हुई बैठक में सर्वसम्मति से मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 फीसदी निर्धारित की गई। इसके परिणाम स्वरूप अब मध्य प्रदेश को सिर्फ 231.80 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा। सीएम ने कहा कि बैठक में गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत की गई है। वहीं, महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत से घटाकर 7.66 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटाकर 1.17 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इससे गुजरात को सभी राज्यों से कुल 553.43 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे।
वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि, सरदार सरोवर से मध्य प्रदेश डूबा, जमीन हमारी गई, गांव हमारे उजड़े, बदले में मध्य प्रदेश को ही 550 करोड़ देने होंगे। उन्होंने कहा कि, भाजपा सरकार ने वर्षों से लंबित नर्मदा जल विवाद में एक विवादास्पद समझौता कर लिया है। जब प्रदेश ने स्वयं हजारों करोड़ रुपए का दावा किया था तो फिर इतनी बड़ी राशि छोड़ने का फैसला क्यों लिया गया?
विपक्षी दल के नेता उमंग सिंघार ने आगे कहा कि, एमपी की जमीन, किसान, आदिवासी और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की कीमत अब कौन देगा? उन्होंने पूरे समझौते की शर्तें और तथ्य जनता के सामने सार्वजनिक करने की मांग की। वहीं, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि, सीएम ने केंद्र और गुजरात सरकार के राजनीतिक दबाव के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। उनके इस कृत्य से प्रदेश को अपने जायज हक से हाथ धोना पड़ा है। एआइसीसी के सचिव कुणाल चौधरी ने सरकार से इस समझौते पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा, सरकार केंद्र के दबाव में मप्र के ग्रामीण, किसानों का हक गुजरात सरकार को देने जा रही है। इसे गुपचुप तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।