
Gutkha side effects: गुटखा और सुपारी की लत धीरे-धीरे मुंह खोलने की क्षमता छीन सकती है। स्थिति गंभीर होने पर खाना चबाना और बोलना तक मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं, यह बीमारी मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ाती है। मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने के लिए एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने दो सर्जिकल तकनीकों का तुलनात्मक अध्ययन किया है। इसमें ऑपरेशन के बाद मुंह खुलने की क्षमता (Mouth opening problem) और छह महीने तक उसके बरकरार रहने का आकलन किया गया। शोध फ्रांस से प्रकाशित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (Oral Submucous Fibrosis) मुंह की कैंसर-पूर्व स्थिति है। इसमें मुंह के अंदर के ऊतक धीरे-धीरे सख्त होने लगते हैं। इससे मुंह खोलने, भोजन करने और बोलने में परेशानी होती है। सुपारी, गुटखा और तंबाकू युक्त उत्पादों का सेवन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। बीमारी गंभीर होने पर मुंह खोलने की क्षमता बहाल करने के लिए ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) के शोध में गाल के भीतर मौजूद वसायुक्त गद्दी (बुक्कल फैट पैड) और त्वचा की पूरी मोटाई के प्रत्यारोपण (फुल-थिकनेस स्किन ग्राफ्ट) की तुलना की गई। अध्ययन में 28 मरीजों के उपचार संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। दोनों तकनीकों से ऑपरेशन के बाद मुंह खोलने की क्षमता में सुधार हुआ। छह महीने के आकलन में दोनों के परिणामों में महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। हालांकि, गाल की वसायुक्त गद्दी वाली तकनीक में अंदरूनी परत जल्दी बनी और ऑपरेशन में कम समय लगा।
एम्स भोपाल के डेंटल विभाग की ओपीडी में रोजाना इस बीमारी के करीब 8 से 10 मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।
सुपारी, गुटखा और तंबाकू छोड़ें। मुंह खोलने में लगातार कमी, जलन या सफेद अथवा लाल धब्बे दिखने पर दंत विशेषज्ञ से जांच कराएं। सर्जरी के बाद भी नियमित निगरानी जरूरी है, क्योंकि इससे कैंसर का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता।