भोपाल

भोपाल सहित आधा दर्जन जिले एक भी गांव का तैयार नहीं कर पाए जीपीडीपी का खाका

- सभी गांवों का तैयार होना था विकास योजना, लेकिन सिर्फ 1102 गांवों का बना प्लान - प्लान तैयार नहीं होने से रुकी गांवों के विकास कार्यों की गति, तीन माह के अंदर बुलाया प्लान
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Dec 03, 2019
भोपाल सहित आधा दर्जन जिले एक भी गांव का तैयार नहीं कर पाए जीपीडीपी का खाका
भोपाल सहित आधा दर्जन जिले एक भी गांव का तैयार नहीं कर पाए जीपीडीपी का खाका

भोपाल। ग्राम पंचायतों के लिए जो भी योजना बने वह जिला और राजधानी स्तर पर नहीं, बल्कि गांव में ही बने। कमलनाथ सरकार ने जिला सरकार के बाद गांव सरकार को अधिकार देने की रूप रेखा तैयार की है। इसमें सभी गांवों को ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान जीपीडीपी तैयार करने के लिए कहा है।

पंचायत विभाग के अधिकारी गांव के विकास योजना तैयार करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। पिछले आठ माह में 23 हजार पंचायतों में से मात्र1102 का विकास योजना तैयार हो पाई है। प्रदेश में गांवों के विकास की गति जीपीडीपी नहीं बनने से रुकी हुई है।

ग्राम पंचायतों को विकास योजना तैयार करने का समय दिया
प्रदेश की राजधानी होने के बाद भी भोपाल के एक भी ग्राम पंचायत का विकास प्लान तैयार नहीं हो पाया है। विकास प्लान तैयार नहीं होने पर पंचायत विभाग ने अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए तीन माह के अंदर प्रत्येक ग्राम पंचायतों को विकास योजना तैयार करने का समय दिया है।

सरकार का मानना है कि ग्राव के विकास की रूप रेखा जिले और राजधानी स्तर पर न हो, बल्कि गांव से बनकर सरकार के पास आए। इससे ग्रामीणों के अनुकूल योजना बनेगी और विकास की गति भी तेजी से बढ़ेगी। गौरतलब है कि भोपाल के अलावा भी दमोह, रतलाम, सतना, शहडोल और शिवपुरी में भी एक भी ग्राम पंचायतों का अभी तक प्लान तैयार नहीं हो पाया है।


10 विभागों के साथ मिलकर बनाना है प्लान
ग्राम पंचायतों को स्कूल, स्वास्थ्य, महिला बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा, पीएचई शिक्षा, एसआरएम, पीएचई के मैदानी अधिकारियों के साथ योजना तैयार करना है। ग्राम पंचायत स्तर पर वर्ष 2020-21 के लिए बनने वाली विकास योजना में सभी विभागों का समान भूमिका एवं सहभगिता रहे इसके लिये ग्राम पंचायतों में नियुक्ति नोडल, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, कृषि मित्र, एवं मप्र राज्य आजीविका मिशन के सीआरपी, सीएमटी को शामिल किया गया है। योजना में यह देखा जाएगा कि गांव में वर्तमान में कौन से सुविधाएं नहीं हैं और वह किस विभाग से जुड़ी हुई हैं।

प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा जाता है

इसके रोड मैप तैयार करने के लिए सभी जनपद पंचायतों में एक मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए हैं, जो पंचयतों को प्लान करने के लिए सहयोग करेंगे। प्लान तैयार होने के बाद इस प्रस्ताव को ग्राम सभा में पास कर जनपद पंचायत में भेजा जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा जाता है।

ग्राम विकास योजना में बच्चों से जुड़े विषय होंगे शामिल
ग्राम पंचायत विकास योजना में बच्चों से जुड़े विषय भी शामिल किए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सोमवार को यूनिसेफ और समर्थन संस्था द्वारा ग्राम विकास योजना को चाइल्ड फ्रेन्डली बनाने विषयक कार्यशाला में यह जानकारी दी।

सुधार लाने के प्रयास किये जा रहे
मंत्री पटेल ने कहा कि विकास योजना में बच्चों से सम्बन्धित शिक्षा, शैक्षणिक सुविधा, स्वच्छता, कुपोषण, बालश्रम, बाल-विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

हर वर्ष 14 नवम्बर को बाल-ग्राम सभा

प्रधानमंत्री स्व. पण्डित जवाहरलाल नेहरू के जन्म-दिवस 14 नवम्बर को प्रदेश के ग्रामीण अंचल में प्रतिवर्ष बाल ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी। मंत्री कमललेश्वर पटेल ने आयुक्त पंचायत राज को कार्य-योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। यूनिसेफ के स्टेट हैड माइकल जूमा ने कहा कि यूनिसेफ का मुख्य उददे्श्य प्रदेश के ग्रामीण अंचल के बच्चों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास में अगली पीढ़ी के रूप में बच्चों की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में बाल-मंच और बाल-संगठनों का गठन किया जा सकता है।

Published on:
03 Dec 2019 09:12 am