भोपाल

Bhopal Gas Tragedy: पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट के डिजिटलीकरण को लेकर हाईकोर्ट ने एमपी सरकार को लगाई फटकार

Bhopal Gas Tragedy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साल 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के हजारों पीड़ित आज भी इलाज और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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Feb 23, 2025
MP High Court

Bhopal Gas Tragedy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साल 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे भयानक औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक थी। इस हादसे के हजारों पीड़ित आज भी इलाज और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में गैस पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई थी। इस कमेटी को हर तीन महीने में हाईकोर्ट को रिपोर्ट देनी थी, जिससे कोर्ट जरूरी निर्देश जारी कर सके। लेकिन कमिटी ने पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण अब तक नहीं किया है। इस देरी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई, जिसके बाद सरकार ने हलफनामा पेश कर बताया कि यह काम अगले छह महीनों में पूरा कर लिया जाएगा।

ये है पूरा मामला

हाईकोर्ट की जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की बेंच के सामने सरकार ने बताया कि अब छह गैस राहत अस्पतालों में अतिरिक्त स्कैनर मशीनें लगाई गई हैं। इससे अब प्रतिदिन 20,000 पेज की स्कैनिंग हो रही है। सरकार के अनुसार, पूरे 17 लाख पेज का डिजिटलीकरण करने में लगभग 6 महीने लगेंगे।पहले सरकार ने कहा था कि 2014 से पहले के रिकॉर्ड बहुत पुराने हैं और इनकी स्कैनिंग धीमी गति से होगी। उस समय केवल 3,000 पृष्ठ प्रतिदिन स्कैन हो रहे थे, जिससे इस काम को पूरा करने में 550 दिन लग सकते थे।

जल्द किया जाए मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण

इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और सरकार को तेज़ी से काम करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा कि मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण जल्द पूरा किया जाए और हर चरण की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पीड़ितों की स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई बाधा न आए। याचिका की अगली सुनवाई में इस कार्य की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

Updated on:
23 Feb 2025 03:25 pm
Published on:
23 Feb 2025 03:25 pm