
भोपाल। सरकार में चल रहे फर्जीवाड़ा के मामले अमूमन किसी व्यक्ति के पकड़े जाने के बाद ही सामने आते हैं। लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग में 18 सालों का फजीवज़ड़ा एक दंपत्ति के झगढ़े से सामने आया। मामला सामने आने के बाद जो सच सामने आया उससे अधिकारियों की आंखे खुली रह गई।
दरअसल इंदौर में पारिवारिक विवाद के बाद एक डॉक्टर दंपत्ति के बीच तलाक हो गया। इससे नाराज पत्नी ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में अपने ही पति के खिलाफ शिकायत की कि उसने ना तो गांव में सेवा दी ना ही बॉण्ड की राशि भरी। इस मामले के बाद जब सभी कॉलेजों की जांच हुई तो मामला अधिकारियों की सोच से भी बड़ा निकला।
अपनी गलती का अहसास हुआ
बीते सत्रह सालों में प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से यूजी और पीजी करने वाले डॉक्टरों ने गांवों में सेवा नहीं दी। यही नहीं इन डॉक्टरों ने इसके एवज में बॉण्ड की राशि भी नहीं भरी। विभाग को अब अपनी गलती का अहसास हुआ तो, 3899 डॉक्टरों को नोटिस भेजकर बॉण्ड की राशि जमा करने के निदेज़्श दिए हैं। नोटिस के बाद 829 हाजिर हुए। इनमें से 204 डॉक्टरों ने बॉण्ड की राशि के रूप में 5 करोड़ 39 लाख रुपए जमा भी करा दिए हैं। इनमें एमबीबीएस डिग्रीधारी 165, पीजी डिग्रीधारी 22 व पीजी डिप्लोमा वाले 17 हैं। अब विभाग बॉंण्ड की कुल राशि के आंकलन में जुटा है।
ये है नियम
नियमों के मुताबिक यूजी और पीजी करने के बाद डॉक्टरों को एक साल अनिवार्य ग्रामीण सेवा करनी होती है। इसके लिए कॉलेज डॉक्टरों के मूल दस्तावेज जमा कर उनसे बॉण्ड भरवाता है। 2002 में बॉण्ड की राशि 40 हजार रुपए थी तो 2018 में 10 लाख रुपए हो गया। अगर कोई डॉक्टर गांव नहीं गया तो उसे बॉण्ड की राशि जमा करनी पड़ती है।
डॉक्टरों की कोई खोज खबर नहीं ली
इन डॉक्टरों ने यूजी और पीजी करने के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए विभाग से अपने मूल दस्तावेज ले लिए। साथ ही यह लिखित में दिया कि अगला कोर्स पूरा होने के बाद वे अनिवार्य ग्रामीण सेवा करेंगे। लेकिन मूल दस्तावेज मिलने के बाद वे डॉक्टर कभी लौटकर ही नहीं आए। विभाग ने भी इन डॉक्टरों की कोई खोज खबर नहीं ली।
अब सख्त हो गए बॉण्ड के नियम
इस तरह के फर्जीवाडे़ आगे ना हो इसके लिए विभाग ने बॉण्ड की राशि को बढ़ा दिया है। अब गांव में ना जाने के एवज में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को निजी मेडिकल कॉलेज की एक साल की फीस का पांच गुना राशि जमा करनी होगी, जो कि लगभग 55 लाख रुपए होगी। हालांकि निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए यह राशि 10 लाख रुपए है।
इतने डॉक्टरों को जारी किए नोटिस
कॉलेज - एमबीबीएस- पीजी डिप्लोमा - पीजी डिग्री
जीएमसी भोपाल- 425 - 154 - 196
एजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर - 500 -260- 230
जीआरएमसी ग्वालियर - 402 - 166 - 192
एनएससीबी मेडिकल कॉलेज जबलपुर - 594- 188-172
एसएस मेडिकल कॉलेज, रीवा - 114 - 100 - 142
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर - 64 - 00- 00
सात कॉलेजों में कुल संख्या - 2099 -868 -932