भोपाल

एमपी में मूंग के रेट में 500 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी, मालामाल होंगे किसान

Moong prices in MP - सरकार का सिरदर्द: तय कोटे से अतिरिक्त खरीदा जा रहा मूंग, नहीं मिल पा रहा उचित दाम, मूंग पर 2 हजार करोड़ का घाटा पहले से, अब 1200 करोड़ और
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Jul 31, 2026
Increase of up to 500 rs per quintal in Moong prices in MP
Moong prices increase in MP- Demo Pic- Patrika.com

Moong Prices - एमपी में हर साल गर्मी में पैदा की जा रही मूंग सरकार के लिए सिरदर्द बन गई है। सरकार को वर्ष 2023-24 व 2024-25 की मूंग पर 2 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। बीते साल खरीदी मूंग पर 1200 करोड़ का और नुकसान होना तय है। यह नुकसान केंद्र द्वारा तय कोटे से अतिरिक्त खरीदी वाली मूंग के कम दाम मिलने से है। इधर खरीदी के लिए आंदोलन करना किसानों के लिए दोहरा लाभ लेकर आया। एक ओर जहां राज्य सरकार ने खरीदने की लिमिट बढ़ा दी वहीं दूसरी ओर मूंग की कीमतों में भी जोरदार बढ़ोत्तरी हो गई है। प्रति क्विंटल 500 रुपए तक दाम बढ़ गए हैं।

केंद्र हर साल खरीदी के लिए समर्थन मूल्य व राज्यों का कोटा तय करता है। बीते 3 साल से जो कोटा तय है, मप्र उससे ज्यादा मूंग खरीद चुका है। राज्य द्वारा तय कोटे से अतिरिक्त् खरीदा जा रहा मूंग केंद्र नहीं उठा रहा। इसे खुले बाजार में टेंडर के जरिए बेचना पड़ रहा है, जहां व्यापारी सरकार को वह दाम नहीं दे रहे हैं, जो उसने समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदा था।

मप्र ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में किसानों से कुल 5.60 लाख मी. टन की खरीदी, इसमें से 2.84 लाख मी. टन केंद्र के कोटे के अतिरिक्त थी। जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में किसानों से 5.80 लाख मी. टन खरीदी की, जो केंद्र के तय कोटे से 2.49 लाख मी. टन अधिक थी। इस तरह शुरू के 2 साल में किसानों से 5.33 लाख मी. टन अतिरिक्त मूंग खरीदी। यह खरीदी प्रति क्विंटल 8682 से 8768 रुपए पर खरीदी थी। जो केंद्र का समर्थन मूल्य था। सीएमओ के एक अफसर ने बताया कि जब उक्त मूंग को बेचने टेंडर किए, जो प्रति क्विंटल 1500 से 2000 कम दाम मिले। नुकसान को देखते हुए इन्हे निरस्त किया, लेकिन बार- बार प्रयास के बावजूद खरीदी दाम के बराबर भी टेंडर नहीं मिले। इसके चलते 2 हजार करोड़ का नुकसान उठाकर मूंग बेचना पड़ा।

एक दिन में मूंग की कीमतें 500 रुपए तक बढ़ीं

प्रदेश सरकार की समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की लिमिट बढ़ाने की घोषणा के साथ में राज्य की मंडियों में मूंग की आवक घट गई लेकिन भाव 300-500 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ गए। अनाज कारोबारी संजीव जैन बताते हैं प्रदेश की मंडियों में गुरुवार को लगभग 20 हजार क्विंटल मूंग बिकने आया जबकि एक दिन पहले 25 हजार क्विंटल के आसपास रहा था। प्रदेश की मंडियों में मूंग का अधिकतम भाव 7605 रुपए तथा मॉडल भाव 6900 रुपए क्विंटल रहा। हालांकि बढ़ते भाव के बावजूद किसान खुश नहीं दिख रहा है। उनका कहना है कि मंडियों में मूंग बेचने पर अभी भी 1500-3000 रुपए क्विंटल तक का क्वालिटी अनुसार नुकसान हो रहा है।

भोपाल में आंदोलन के बाद सरकार ने खरीदी लिमिट 25 से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दी। पहले जहां प्रति एकड़ 120 किलो (लगभग सवा क्विंटल) खरीदी के नियम थे, उसे बढ़ाकर 300 किलो (3 क्विंटल) कर दिया। इसके बाद गुरुवार को मंडियों में मूंग की आवक एकाएक घट गई।

मूंग विवाद को ऐसे किया जा सकता है खत्म

मूंग में किसान अंधाधुंध कीटनाशक का उपयोग कर रहे हैं। इसके कारण दानों में जहर का असर है तो केंद्र व राज्य इसकी जांच कराए और जहरीली होने की पुष्टि होने पर इसकी पैदावार पर रोक लगा दे। यदि यह जहरीली नहीं है तो इसमें उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों की बिक्री पूरी तरह रोके। राज्य में पैदा होने वाली मूंग का एक- एक दाना केंद्र खरीदे।

आगे और 1200 करोड़ का नुकसान

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मप्र ने कुल 7.72 लाख मी. टन मूंग की खरीदी की, जो केंद्र के तय लक्ष्य 4.19 लाख मी. टन से 3.53 लाख मी. टन अधिक थी। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक इसे बेचने के लिए 3 बार टेंडर किए जा चुके हैं लेकिन यह बिक नहीं रही। व्यापारी कम दाम लगा रहे हैं, इसे ज्यादा दिन रखा तो खराब होने का खतरा है। जो दाम मिल रहे हैं, यदि वे आगे बढ़कर नहीं मिले तो 1200 से 1500 करोड़ का नुकसान तय है।

किसान बात मनवा लेते हैं, हम कहां जाए

मूंग खरीदी को लेकर हर साल विवाद की स्थिति बन रही है। केंद्र जो कोटा दे रहा है, मप्र में उससे ज्यादा पैदावार हो रही है। केंद्र से ज्यादा खरीदने पर सरकार को नुकसान हो रहा है, जबकि नहीं खरीदने पर किसान परेशान होते हैं। राज्य में मार्कफेड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसान तो विरोध दर्ज करके मांगें मनवा लेते हैं, लेकिन हम कहां जाएं, नुकसान उठाकर मूंग बेचने पर जवाब देना पड़ रहा है।

Updated on:
31 Jul 2026 06:51 am
Published on:
31 Jul 2026 06:50 am