मध्य प्रदेश के आयुष्मान मॉडल से सिर्फ इसी राज्य में आयुष्मान कार्ड से आइवीएफ संभव।
निसंतान महिलाओं के लिए स्वदेशी ड्रग उम्मीद की किरण बनकर आई है। इस ड्रग की मदद से बेहद कम लागत में आइवीएफ प्रक्रिया के जरिए वे मां बन सकती हैं। औसतन आइवीएफ में डेढ़ से तीन लाख तक का खर्च आता है। लेकिन, सही समय पर स्वदेशी ड्रग के इस्तेमाल से ये खर्च महज 80 से 90 हजार तक ही आता है।
बड़ी बात ये है कि, देशभर में मध्य प्रदेश ही ऐसा अकेला राज्य है, जहां आयुष्मान योजना के तहत आइवीएफ के लिए आर्थिक मदद मिलती है। ये जानकारी इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्शन के 27वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान डॉ. मोनिका सिंह ने दी।
गुजरात में बन रहे आइवीएफ इंजेक्शन
गुजरात की कुछ स्वदेशी कंपनियां भी आइवीएफ इंजेक्शन बना रही हैं। महिलाओं को इसके 10 से 15 इंजेक्शन लगते हैं। विदेशी इंजेक्शन की कीमत कम से कम 10 हजार होती है। जबकि, स्वदेशी इंजेक्शन इसके आधे रेट में मिल जाते हैं।
अधिक आयु में बढ़ जाता है खर्च
निसंतानता पर पहले से ध्यान देना जरूरी है। शादियां लेट हो रहीं हैं। जैसे - जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे - वैसे संतान पैदा करना मुश्किल होता है। अधिक आयु में आइवीएफ का खर्च बढ़ जाता है। साथ ही, सफलता का प्रतिशत भी कम हो जाता है।
ऐसे लें सरकारी मदद
मध्य प्रदेश के मरीजों को आइवीएफ के लिए सरकारी मदद चाहिए तो उसके लिए आयुष्मान कार्ड होना अनिवार्य है। मध्य प्रदेश का निवासी, उम्र 21 से 45 साल के बीच और शादी के तीन साल पूरे हैं तो आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मोनिका सिंह
सम्मेलन के ऑर्गनाइजिंग चेयर पर्सन डॉ.रंधीर सिंह और डॉ. मोनिका सिंह ने आइवीएफ की कॉस्ट कटिंग के बारे में बताया। डॉ. मोनिका सिंह ने बताया कि, मध्य प्रदेश में आइवीएफ तकनीक का इलाज आयुष्मान योजना में शामिल है। इसमें पात्र महिलाओं को 80 हजार तक की आर्थिक मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि, आइवीएफ के लिए अभी जो ड्रग मौजूद हैं, वे सब विदेशी हैं। लेकिन, अब देश में भी कई एजेंसी इन ड्रग को बना रही हैं, जिनसे आइवीएफ की लागत आधी से भी कम हो सकती है।
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