
AIIMS Bhopal:एमपी में भोपाल एम्स ने जबड़े के कैंसर मरीजों को बड़ी राहत दी है। बता दें कि अभी तक जबड़े के कैंसर में डॉक्टरों को ऑपरेशन के दौरान हड्डी का हिस्सा निकालना पड़ सकता था। इससे चेहरे की बनावट बिगड़ने के साथ मरीज को खाना चबाने और बोलने में परेशानी हो सकती है। लेकिन अब डिजिटल तकनीक की मदद से ऑपरेशन से पहले ही जबड़े का त्रि-आयामी (3डी) मॉडल बनाकर सर्जरी की योजना तैयार की जा सकती है। इससे कैंसर प्रभावित हिस्सा निकालने के साथ जबड़े का पुनर्निर्माण अधिक सटीक तरीके से करने में मदद मिलेगी।
एम्स भोपाल में पहली बार इस तकनीक पर वर्चुअल सर्जिकल कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में 100 से अधिक चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। ऑस्ट्रेलिया के रॉयल डार्विन हॉस्पिटल, सीएमसी वेल्लोर और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लानिंग पर व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों ने प्रभावित हड्डी हटाने, जबड़े के पुनर्निर्माण, सर्जिकल गाइड डिजाइन करने और दांत लगाने की योजना बनाने का अभ्यास किया।
डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी जबड़े के कैंसर से जूझ रहे व्यक्ति के लिए चीजें पहले से आसान होंगी। वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग में मरीज के सीटी स्कैन से जबड़े की 3-डी तस्वीर तैयार की जाती है। डॉक्टर इस मॉडल को अलग-अलग कोणों से देखकर तय कर सकते हैं कि कैंसर प्रभावित हिस्से की कितनी हड्डी निकालनी है और जबड़े को किस आकार में दोबारा बनाना है। जरूरत के अनुसार विशेष सर्जिकल गाइड और प्लेट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। जिससे मरीज के फेस के आकार में कम से कम परिवर्तन आएगा।
डॉक्टर्स का मानना है कि जबड़े का पुनर्निर्माण केवल चेहरे की बनावट सुधारने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य मरीज की चबाने और बोलने की क्षमता को भी बेहतर बनाना है। जरूरत पड़ने पर पैर की पिंडली की हड्डी लेकर जबड़ा दोबारा बनाया जा सकता है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल ने कहा कि मरीजों की जान बचाने के साथ उनके चेहरे की बनावट और कार्यक्षमता बहाल करना भी जरूरी है। इसलिए तकनीकी का उपयोग तेजी से किया जा रहा है।