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अब शरीर में AI बताएगा ‘वात-पित्त-कफ’ का असंतुलन, एमपी में गर्भवती महिलाओं को दी जाएगी औषधियां

Ayush se Aarogya Campaign: मप्र में एआई से वात-पित्त-कफ का आकलन कर बीमारियों की पहचान के लिए आयुष से आरोग्य अभियान शुरू होगा। गांवों में योग, गर्भवतियों को आयुष किट और जीवनशैली सुधार का परामर्श मिलेगा।
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भोपाल

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Astha Awasthi

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Updated: 29 Oct 2026, 8:18 AM IST

एआई पहचानेगा बीमारियां, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

एआई पहचानेगा बीमारियां, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: मध्यप्रदेश में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की मदद से लोगों के वात, पित्त और कफ की स्थिति का 4 आकलन कर संभावित बीमारियों की पहचान करने की तैयारी है। इसके लिए प्रदेशभर में आयुष से आरोग्य अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें लोगों की जांच के बाद उनकी प्रकृति और जरूरत के अनुसार आयुष औषधियां, खानपान और जीवनशैली सुधार का परामर्श मिलेगा। अभियान का उद्देश्य बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान, गंभीर रोगों की रोकथाम और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना है। इस अभियान को आयुष विभाग पंचायत, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से लागू करेगा। आयुष ने इसके लिए दूसरे विभागों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। पंचायत विभाग के साथ बैठक हो चुकी है, जबकि गर्भवतियों को आयुष किट देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक प्रस्तावित है।

केरल-तमिलनाडु मॉडल पर बनाई योजना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मई को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए केरल और तमिलनाडु की आयुष सेवाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग के चार सदस्यीय दल ने दोनों राज्यों का दौरा कर वहां की उपचार पद्धतियों और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का अध्ययन किया। दल ने अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। इसमें केरल में गर्भवती महिलाओं को आयुष किट देने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के अनुसार, रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश की जरूरतों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

अभियान से होंगे ये प्रमुख लाभ

बीमारियों की पहचानः एआइ का शुरुआती संकेत मिल सकेगा। हालांकि, पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होगी।

गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं: पंचायत स्तर पर योग और आयुष परामर्श से ग्रामीणों को सेवाओं का लाभ मिलेगा।

सामान्य प्रसव को प्रोत्साहनः गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य परामर्श और किट मिलने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिल सकती है।

कुपोषण से मुकाबले में मदद: महिला एवं बालविकास विभाग के समन्वय से जरूरतमंद बच्चों तक पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं पहुंचाई जा सकेंगी।

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर नियंत्रणः नियमित योग, संतुलित आहार और दिनचर्या में सुधार से मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

गर्भवती महिलाओं को मिलेगी आयुष किट

अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य होगा। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के लिए आने वाली और पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को आयुष किट देने की तैयारी है। इसमें ऐसी औषधियां शामिल करने की योजना है, जो गर्भावस्था में स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने और सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, किट में शामिल औषधियों और उनके उपयोग की अंतिम रूपरेखा तैयार की जाना बाकी है।

हर गांव में योग प्रशिक्षक

गांवों में नियमित योगाभ्यास की व्यवस्था की जाएगी। पंचायतों को इसके लिए स्थान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जहां योग प्रशिक्षक प्रतिदिन ग्रामीणों को योग कराएंगे। इसके साथ मौसम के अनुसार खानपान, दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी दी जाएगी। अभी आयुष वेलनेस सेंटरों में योग प्रशिक्षक हैं, इस मॉडल को गांवों तक विस्तार देंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से कुपोषण दूर करने के लिए भी आयुष औषधियों का वितरण किया जाएगा।