
MP Congress : सीहोर जिले के कोसमी में वन विभाग की कार्रवाई पर प्रदेश की सियासत सरगर्म है। घटना के विरोध में भोपाल आ रहे आदिवासी परिवारों को राज्य सरकार ने जमीन के पट्टे देने और मकान तोड़ने की जांच का आश्वासन दिया है। इस पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को बीजेपी को घेरा है। उन्होंने आदिवासियों से कहा है कि सरकार पर भरोसा न करें। यह आपके घर, जमीन, सम्मान और भविष्य की निर्णायक लड़ाई है। इससे पहले गुरुवार को शुरू हुआ भोपाल पैदल मार्च देर रात स्थगित हो गया था। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आदिवासी समाज के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और वन विकास निगम के अधिकारियों के कथित अशोभनीय व्यवहार की जांच का भरोसा दिया। इसके बाद प्रशासन ने बसों की व्यवस्था कर पैदल मार्च में शामिल आदिवासियों को उनके घर रवाना कर दिया था। इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेताओं ने तंज कसा है।
बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी में वन भूमि से 12 आदिवासी परिवारों को बेदखल किए जाने का जबर्दस्त विरोध किया जा रहा है। यहां वन विकास निगम ने 11 अक्टूबर को वन भूमि पर रह रहे परिवारों को हटाने की कार्रवाई की थी। इसके विरोध में आदिवासी परिवार लालकुई डिपो क्षेत्र में धरने पर बैठ गए थे।
करीब चार दिन तक धरना देने के बाद गुरुवार को धरना समाप्त कर आदिवासियों ने भोपाल के लिए पैदल मार्च शुरू किया। आदिवासियों का पैदल मार्च भोपाल पहुंचता, इससे पहले गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ आदिवासी समाज के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान ने किया। करीब डेढ़ से दो घंटे चली चर्चा में वन विकास निगम की कार्रवाई सहित आदिवासी परिवारों की मांगों को विस्तार से रखा गया।
बताया गया कि मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने का भरोसा दिया। वन विकास निगम के अधिकारियों द्वारा किए गए कथित अशोभनीय व्यवहार की भी जांच कराने की बात कही गई। साथ ही जिन प्रभावित आदिवासी परिवारों के पास जमीन नहीं है, उनके मामले में भी समाधान का आश्वासन दिया गया।
भोपाल में हुई बैठक के बाद सीहोर कलेक्टर बालागुरु के., पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना, बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रवि मालवीय और भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा कोनाझिर पहुंचे। यहां रात में रुके पैदल मार्च में शामिल आदिवासियों से चर्चा की गई और मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक की जानकारी दी गई। इसके बाद आदिवासी समाज ने भोपाल तक पैदल मार्च को स्थगित करने का निर्णय लिया। प्रशासन ने बसों की व्यवस्था की और रात में ही आंदोलन में शामिल लोगों को उनके घरों के लिए रवाना कर दिया था।
बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव ने बताया कि आदिवासी समाज ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया और जांच कराने का भरोसा दिया है। प्रतिनिधिमंडल की शासन स्तर पर करीब डेढ़ से दो घंटे तक विस्तार से चर्चा हुई। चर्चा से प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट हुआ और इसके बाद पैदल मार्च स्थगित करने पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री स्तर पर हुई बातचीत और जांच के आश्वासन के बाद पैदल मार्च स्थगित कर दिया गया। अब पूरे मामले में शासन की जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर आदिवासी परिवारों की निगाह रहेगी।
घटनाक्रम पर कांग्रेस बीजेपी नेताओं पर हमलावर है। शुक्रवार सुबह कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने एक्स हेंडल पर लिखा:
आदिवासी परिवारजनों,@BJP4MP के वादों पर नहीं, हाथ में आए अधिकारों पर भरोसा करें!
सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में भोपाल आ रहे आदिवासी परिवारों को अब जमीन के पट्टे देने और मकान तोड़ने की जांच का आश्वासन दिया जा रहा है!
कोसमी के परिवारजनों, याद रखें! यह भाजपा के दो नेताओं के बीच की राजनीतिक खींचतान है, लेकिन आपके लिए यह आपके घर, जमीन, सम्मान और भविष्य की निर्णायक लड़ाई है!
भाजपा चुनाव से पहले वादे करती है, आंदोलन के समय आश्वासन देती है और फिर अपने वादों से मुकर जाती है, इसलिए किसी नेता की बातों में आकर, लड़ाई कमजोर मत पड़ने दीजिए!
जब तक जमीन के पट्टे हाथ में नहीं आते, जब तक जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं मिलता, जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखें!
कांग्रेस #कोसमी के आदिवासी परिवारों के साथ है! अत्याचार करने वाली सरकार से यह कहना भी चाहती है, आदिवासी परिवारों का हक कोई एहसान नहीं, उनका अधिकार है!
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