भोपाल

जिस संयुक्त कलेक्टर ने किसानों को दी थी गाली, अब वो ही संभालेंगे शहर की प्रशासनिक कमान

Ratlam News : अनिल भाना रतलाम शहर के एसडीएम बनाए गए, विवाह समारोह के लिए अवकाश पर गए संजीव केशव पांडेय अब पदस्थापन की प्रतीक्षा में..।
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Ratlam News : अपनी पदस्थापना के बाद मध्य प्रदेश के रतलाम कलेक्टर राजेश बाथम ने बड़ी प्रशासनिक सर्जरी कर दी है। अवकाश पर गए रतलाम शहर एसडीएम संजीव केशव पांडेय को पदमुक्त कर दिया है। इस कुर्सी की कमान संयुक्त कलेक्टर अनिल भाना को सौपी गई है। बता दें कि भाना को बीती फरवरी में जावरा एसडीएम पद से उस समय हटाया गया था, जब उनका किसान को गाली देने वाला वीडियो वायरल हुआ था। विभागीय जांच भी शुरू हुई थी, लेकिन क्लीनचीट मिली या नहीं, ये अभी स्‍पष्‍ट नहीं है। भाना रतलाम के तहसीलदार, एसडीएम और नगर निगम आयुक्त भी रह चुके हैं।

जावरा एसडीएम रहे भाना ने वायरल वीडियो में किसान को कहा था, 'मैं 25 गालियां दूंगा। मेरे से तमीज से रहना। मुझे जानते नहीं हो।' समूह में शामिल एक किसान से उन्होंने यह तक कह दिया था, 'समझ नहीं आएगा, कहां जाएगा।' सोशल मीडिया पर मचे बखेड़े के बाद तत्कालीन कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने अपर कलेक्टर राधेश्‍याम मंडलोई को जांच सौंपी थी। तब कृषक आयोग अध्यक्ष ईश्वरलाल पाटीदार के साथ 25 से अ​धिक किसान कलेक्टर लाक्षाकार से मिले भी थे। किसानों ने आरोप लगाया था कि बगैर मुआवजा दिए ही उनकी भूमि पर रेलवे रेल लाइन डाली जा रही है।

बता दें कि रतलाम शहर के एडीएम (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट) कार्यालय में किसानों की 500 से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। इनमें कुछ शिकायतें इस प्रकार हैं-

-भूमि और पट्टे से संबंधित समस्याएं

कई किसानों ने भूमि के स्वामित्व और पट्टे से संबंधित आवेदनों को एसडीएम कार्यालय में जमा करवा रखा है। इसमें भूमि रजिस्ट्रेशन, भूमि विवाद और भूमि के रिकॉर्ड को अपडेट करने के मामले प्रमुखता से शामिल हैं।

-फसल बीमा और मुआवजा

फसल नुकसान की स्थिति में बीमा राशि और मुआवजे की प्रक्रिया में देरी या समस्याएं भी किसानों की परेशानी का बड़ा सबक है। पुरानी अर्जियां बता रही हैं कि किसानों को नुकसान का सही आकलन और मुआवजे की राशि प्राप्त करने में कठिनाई होती है।

-सिंचाई और जल संसाधन

पानी की उपलब्धता और सिंचाई की समस्याएं भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। जल संसाधनों का उचित प्रबंधन और वितरण सुनिश्चित करने में कई अवसरों पर स्‍थानीय प्रशासन असफल हुआ है।

-कृषि ऋण और वित्तीय सहायता

किसानों को कृषि कार्य के लिए ऋण की आवश्यकता रहती है। बैंक या वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में प्रशासनिक मंजूरियां बड़ी बाधा बनती हैं। राज्‍य सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता और सब्सिडी का समय पर वितरण भी किसानों की समस्याओं में शामिल है।

-बाजार और फसल बिक्री

फसल की उचित कीमत न मिलना और बाजार में उत्पाद बेचने में समस्याएं भी किसानों की आम समस्याओं में से एक होती हैं। स्थानीय एसडीएम कार्यालय में मंडी अव्यवस्था और मूल्य निर्धारण की अपेक्षाओं से जुड़े आवेदन भी फाइलों में जमा हैं।

-कृषि उपकरण और तकनीकी सहायता

आधुनिक कृषि उपकरण और तकनीकी सहायता की उपलब्धता में भी समस्याएं आती हैं। किसानों लंबे समय से सहायता की आवश्यकता अनुभव कर रहे हैं।

ये बदलाव भी हुआ

-रतलाम ग्रामीण क्षेत्र त्रिलोचन गौड़ को जावरा का एसडीएम बनाया गया है।
-डिप्टी कलेक्टर विवेक सोनकर रतलाम ग्रामीण के एसडीएम बनाए गए हैं।

ये कलेक्टर का अ​धिकार है!

रतलाम के पूर्व कलेक्टर राजेंद्र शर्मा का कहना है कि कौन से अ​धिकारी से क्या काम लिया जाए, ये कलेक्टर का अ​धिकार है। सार्वजनिक जीवन में जनता की असहमति सामान्य बात है। लेकिन, प्रशासनिक अधिकारियों को भी संयम से कार्य संपादित करना चाहिए।

Updated on:
12 Jul 2024 03:46 pm
Published on:
12 Jul 2024 03:43 pm