
भोपाल.मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी की बात किसी से छिपी नहीं है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद भी गुटबाजी बात सामने आई थी। साथ ही बीच-बीच में मध्यप्रदेश सरकार ( madhya pradesh governement ) में भी गुटबाजी की झलक दिख जाती है। अब नया मामला है प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर। कमलनाथ सरकार ने पहली राजनीतिक नियुक्ति की है। अशोक सिंह ( Ashok Singh ) को अपेक्स बैंक ( apex bank chairman ) का अध्यक्ष बनाया गया है।
इस नियुक्ति को प्रदेश की सियासत में कांग्रेस की गुटबाजी से ही जोड़कर देखा जा रहा है। अशोक सिंह अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बने हैं। ये वहीं अशोक सिंह हैं जो इस बार ग्वालियर से कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े थे। लेकिन चुनाव हार गए थे। लोकसभा चुनाव के दौरान इनके टिकट का ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia ) ने विरोध किया था। उसके बावजूद उनके विरोध को नजरअंदाज कर सीएम कमलनाथ ( Kamal Nath ) ने उन्हें टिकट दिया था।
सिंधिया करते हैं नापसंद
कहा जाता है कि कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अपेक्स बैंक के अध्यक्ष अशोक सिंह को नापसंद करते हैं। लेकिन उनके नापसंद को एक बार फिर से दरकिनार कर कमलनाथ ने उन्हें नई जिम्मेवारी दी है। अशोक सिंह सिंधिया के गुट के नहीं माने जाते हैं। इसलिए वे बार-बार अशोक सिंह की ग्वालियर से उम्मीदवारी का विरोध करते रहे हैं।
बंद कमरे में बनी बात
सूत्रों की मानें तो हाल ही में भोपाल दौरे के समय सीएम और सिंधिया की मुलाकात में अशोक सिंह के संबंध में बात हुई और सिंधिया को सहमति देनी पड़ी। दरअसल, सिंधिया गुट के मंत्री तुलसी सिलावट के घर पर डिनर का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में सीएम कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे थे। डिनर शुरू होने से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और सीएम कमलनाथ के बीच बंद कमरे में बात हुई थी। कहा जा रहा है कि अशोक सिंह के संबंध में यही बात हुई और सिंधिया को सहमति देनी पड़ी।
दिग्विजय खेमे के हैं अशोक
अपेक्स बैंक के अध्यक्ष अशोक सिंह पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के खेमे के हैं। लेकिन दिग्विजय सिंह ने अपेक्स बैंक के लिए दूसरे नाम भी प्रस्तावित किए थे। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नाम शामिल हैं। ऐसे में कहा यह भी जा रहा है कि कमलनाथ ने इस बहाने अपना वर्चस्व बढ़ाया है।
सत्र के बाद होंगी और नियुक्तियां
वहीं, निगम-मंडलों में अन्य नियुक्तियां विधानसभा के मानसून सत्र के बाद होंगी। संगठन ने साफ कर दिया है कि उन्हीं कार्यकर्ताओं को पद दिया जाएगा, जिन्होंने चुनाव में पार्टी को जिताने में भूमिका निभाई है। इस संबंध में दिल्ली की ओर से पहले ही सर्कुलर जारी हो चुका है। वहीं, प्रदेश प्रभारी रहे दीपक बावरिया ने कार्यकर्ताओं को चिट्ठी भेजकर भरोसा दिलाया था कि जिन्होंने अपना काम ईमानदारी से किया है, उन्हें ही मौका दिया जाएगा।