भोपाल

दतिया में जिन चेहरों को नकारा था वही हर जगह खड़े दिखे, दुष्प्रचार भी नहीं रुका, बीजेपी की हार के 7 प्रमुख कारण

Datia By-Election Result- दतिया में हार पर भाजपा करेगी मंथन, कई प्रमुख वजहें आई सामने, भितरघात की भी शंका भी
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Aug 04, 2026
mp bjp- demo pic
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MP BJP- हरिचरण यादव भोपाल, दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार पर बीजेपी के अंदरखाने हलचल मच गई है। हालांकि यह सीट पहले कांग्रेस के पास ही थी पर पार्टी ने इसे छीनने के लिए पूरा जोर लगाया था। बीजेपी ने दतिया उपचुनाव में विजय प्राप्त करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। पार्टी ने जातिगत समीकरण साधने के लिए अपने नेताओं की फौज उतार दी पर ​परिणाम नहीं मिल सका। दतिया उपचुनाव में विफलता पर बीजेपी ने मंथन करने की बात कही है। हार की कुछ प्रमुख वजहें सामने भी आ गई हैं। दतिया में जहां भितरघात की आशंका है वहीं प्रत्याशी के प्रभाव पर भी सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि जिन लोगों की वजह से पिछले विधानसभा चुनाव में वोटर्स, बीजेपी से छिटक गए थे, उपचुनाव में उन्हीं को ही हर जगह खड़ा पाया। अंतिम दो दिनों में पार्टी के खिलाफ जमकर दुष्प्रचार हुआ जिसे पार्टी नहीं रोक सकी।

उपचुनाव में हार के बाद वरिष्ठ बीजेपी नेता, पूर्व मंत्री व दतिया के 3 बार विधायक रहे नरोत्तम मिश्रा ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मेरी राजनीति का अब पटाक्षेप हो गया है। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि अब किसी पद की इच्छा नहीं रही। हालांकि उन्होंने बीजेपी में बतौर कार्यकर्ता काम करने रहने की बात भी कही है।

उधर परिणाम घोषित होने के बाद बीजेपी में निराशा है। 2023 में पार्टी को विधानसभा में प्रचंड बहुमत मिला था ​लेकिन दतिया सीट गंवा दी थी। प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा यहां हार गए थे। उपचुनाव में बीजेपी ने उनकी टिकट काटकर नए चेहरे आशुतोष तिवारी पर दांव खेला लेकिन परिणाम नहीं बदला।

बीजेपी में दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के कारणों की समीक्षा की बात कही जा रही है। प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने तो अनुशासन तोडऩे वालों पर एक्शन लेने संबंधी सख्त बयान दिया है।

दतिया में बीजेपी को ये 7 कमजोरियां ले डूबीं

1.उद्गवां, जिगना और बसई में भितरघातियों को खुलेआम जमीनी लोगों ने चुनौती दी, वैसी चुनौती शहरों में नहीं मिल सकी।

  1. चुनावी मैनेजमेंट अनुभवी हाथों में नहीं होने से जनता का विश्वास जीतने वालों की पहचान में विफलता भारी पड़ी।
  2. भितरघात की संभावना के बाद भी प्लान-बी तैयार नहीं किया। हार के बाद प्रत्याशी के प्रभाव पर भी सवाल उठ रहे।
  3. संगठन के स्थानीय कार्यकर्ताओं का साथ भी भाजपा को पूरी तरह नहीं मिला।
  4. 2023 के विधानसभा चुनाव में जिस कारण जनता ने भाजपा से मुंह मोड़ा था, उन्हीं चेहरों को हर जगह खड़ा पाया
  5. अंतिम के 48 घंटे में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर हुए दुष्प्रचार नहीं रोके जा सके।
  6. टिकट कटने के बाद प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई नहीं करना भी नुकसान दे गया।
Updated on:
04 Aug 2026 09:05 am
Published on:
04 Aug 2026 09:05 am