
भोपाल. शहरवासियों के फेफड़े प्रदूषित हवा की वजह से खराब हो रहे हैं। जेपी अस्पताल में पिछले दो दिनों में पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) के लिए आए ४० प्रतिशत मरीजों के फेफड़े कमजोर पाए गए हैं। धूलभरी सांस की वजह से उनके लंग्स काले पड़ गए हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज खराश, सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सांस फूलने की समस्या की वजह से अस्पताल पहुंचे थे। चेस्ट फिजीशियन के अनुसार मरीजों की इस स्थिति के लिए शहर की खराब हवा जिम्मेदार है।
सांस की नलियों में सिकुडऩ
गुरुवार से फेफड़ों की क्षमता की जांच के लिए पीएफटी मशीन का उपयोग हो रहा है। इसके तहत फेफड़े की हवा भरने, हवा को अंदर लेने और निकालने की जांच हो रही है। फेफड़ों की ऑक्सीजन सोखने की क्षमता भी देखी जा रही है। ज्यादातर में सांस की नलियों में सिकुडऩ की शिकायत मिल रही है। पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण जल्द नियंत्रित नहीं हुआ तो सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, भ्रम, कमजोरी की समस्या हो सकती है।
36० पहुंचा एक्यूआइ
प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के बावजूद शहर का एक्यूआइ लेवल कंट्रोल में नहीं आ रहा। शुक्रवार को पर्यावरण परिसर केंद्र की रीडिंग में 360 एक्यूआइ दर्ज किया गया। इससे पहले सबसे खराब एक्यूआइ दिवाली के दौरान 323 था। 10 दिनों से शहर में एक्यूआइ का स्तर 300 के करीब बना हुआ है। जबकि,200 से ऊपर लेवल होते ही सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो जाता है।
श्वसन रोग, हृदय रोग और न्यूरोलॉजी में बढ़ी सर्तकता
प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं की वजह से अस्पतालों के जनरल, मेडिसिन, शिशु रोग, श्वसन रोग, हृदय रोग और न्यूरोलॉजी की ओपीडी को सतर्क किया गया है। ऑक्सीजन सपोर्ट, नेब्यूलाईजर, वेंटिलेटर समेत अन्य की उपलब्धता के निर्देश दिए गए हैं।
क्यों है नुकसानदेह
एयर पॉल्यूशन के दौरान हवा में न्यूरोकॉग्निटिव बढऩे लगता है। जिसके कारण नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड ज्यादा मात्रा में बढ़ जाते हैं। ये इंसान के नर्वस सिस्टम को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं।
ये लोग रहे सावधान
अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और इस्केमिक दिल के बीमार।
बाक्स इपीएस के साथ
पत्रिका ने उठाया लगातार मुद्दा
पत्रिका लगातार शहर में चल रहे अनियोजित निर्माण और उसकी वजह से उड़ रही धूल के बारे में खबरें प्रकाशित कर रहा है। खबरों पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने हर जिले के सीएमचओ को अस्पतालों में व्यवस्थाओं के सुधारने के निर्देश दिए। इसी के साथ जेपी अस्पताल में फेफड़े की जांच मशीन के साथ विशेषज्ञों की तैनाती की गयी। अब जेपी में पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) की सुविधा शुरु हो गयी है। चेस्ट फिजिशियन डॉ. अंकित तोमर ने कार्यभार संभाल लिया है।