
Madhya Pradesh Hidden Tourist Places- मध्यप्रदेश का बाहुबली झरना, राहतगढ़ का झरना, पातालकोट, मुरैना का चौसठ योगिनी मंदिर हो, बीजा मंडल हो या कुकरू खामला। यहां जब भी मौका मिलता है पर्यटक पहुंचते रहते हैं। इन स्पॉट को भी सरकार डेवलप करे तो पर्यटकों के लिए सर्वसुविधायुक्त स्थल तैयार हो सकते हैं। फिलहाल कुछ स्पॉट ऐसे हैं जहां पहुंचने के रास्ते सुगम नहीं है, लेकिन पर्यटक पहुंचना चाहते हैं। वर्ल्ड टूरिज्म डे के मौके पर हम जानेंगे मध्यप्रदेश के ऐसे पर्यटन स्थलों के बारे में जो, पर्यटन के नक्शे में नहीं दिखते, लेकिन दुनियाभर में फेमस है।
राजधानी भोपाल से महज 55 किमी दूर स्थित अमरगढ़ वाटर फॉल सीहोर जिले की बुधनी तहसील में आता है। यह गांव सीहोर और रायसेन की सीमा पर स्थित है। यह डामर सड़क से पांच किलोमीटर जंगल में है। तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरे इस झरने की ऊंचाई करीब 100 फीट है। बारिश में यह अपने रौद्र रूप में होता है तो और भी खूबसूरत हो जाता है। करीब 100 फीट दूर तक धुआंधार झरने की तरह पानी की फुहार उड़ना भी इसका प्रमुख आकर्षण है। इसे लोग बाहुबली झरना भी कहते हैं। घने जंगल और रातापानी सेंचुरी से लगे होने के कारण इस इलाके में वन्य जीवों का भी मूवमेंट होता रहता है। साथ ही सड़क मार्ग नहीं होने के कारण और न ही कोई बसाहट के कारण यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया गया। इस क्षेत्र में पहले जीप, टूव्हीलर से लोग पहुंच जाते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से वहां वाहन जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मध्यप्रदेश टूरिज्म के नक्शे पर अमरगढ़ वाटर फॉल नहीं है। फिर भी यह ट्रैकिंग करने वाले और पर्यटकों की नजर में अच्छा स्पॉट बना हुआ है। यहां पढ़ें विस्तार से Amargarh WaterFall
छिंदवाड़ा जिले के तामिया में पातालकोट क्षेत्र है। यह क्षेत्र पातालकोट घाटी के नाम से जाना जाता है। यहां का प्रमुख आकर्षण यह है कि जिस पहाड़ों के बीच की जिस घाटी को देखते हैं, उसमें कई ट्राइबल गांव बसते हैं। यह स्थल 1700 फीट की गहराई में बसा है, जिसमें 11 गांव हैं। सभी तामिया के पहाड़ों से पातालकोट का नजारा लेते हैं, लेकिन उन गांवों तक कोई नहीं जाता है। कई वर्षों से यहां पीढ़ी दर पीढ़ी आदिवासी रहते हैं। पिछले कुछ वर्षों तक तो यहां के आदिवासी इस घाटी से बाहर आकर शहर तक नहीं पहुंच पाए थे। समय बदलता गया तो अब सरकार भी उस क्षेत्र तक पहुंच गई। काफी पिछड़े इलाके को सरकार अब विकसित करने के प्रयास कर रही है। इस क्षेत्र में मानसून में जाना सबसे अच्छा माना जाता है। पहाड़ी से कई मीटर नीचे उतरकर पगडंडियों से नीचे जाते हैं तो नीचे कई लोगों का जीवन देखकर हैरानी होती है। यहां के आदिवासी पारंपरिक तरीके से जीवन यापन करते हैं। अब सरकार के पहुंचने से इन लोगों तक सुविधाएं भी पहुंची है। यह स्थान छिंदवाड़ा जिले से 78 किलोमीटर है और तामिया से 20 किमी है। इस घाटी में दुधी नदी बहती है। यह इलाका घोड़े और जूते के आकार की पहाड़ियों और घाटी से घिरा है। बताया जाता है कि इस इलाके की 2500 मिलियन वर्ष आयु है।
मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा हिल स्टेशन पचमढ़ी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां के हर स्पॉट पर्यटकों के लिए खास महत्व रखते हैं। यहां के हर स्पॉट पर्यटन के नक्शे पर हैं, लेकिन एक स्थान ऐसा भी है जहां कई लोगों के जाने की चाहत होती है, लेकिन वो नहीं पहुंच पाता। यह स्थान भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से बेहद दिलचस्प है। नागद्वार जिसे नागद्वारी भी कहा जाता है, यह स्थल ट्रैकिंग और पर्यटन के शौकीन लोगों की पहली पसंद है। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी अहम है, वहीं ट्रैकिंग की दृष्टि से भी। यह स्थान पर करीब 14 किलोमीटर का ट्रैक है, जो बेहद दुर्गम है। इस कठिन यात्रा की तुलना अमरनाथ यात्रा से भी की जाती है। यह स्थल वाइल्ड लाइफ के कारण सालभर बंद रहता है। महज 10 दिनों के लिए नागपंचमी से पहले खुलता है। चारों तरफ पहाड़ों और जंगलों से घिरे इस दुर्गम क्षेत्र में जाने का कौतूहल ही है कि महज 10 दिनों में लाखों लोग यात्रा के लिए जाते हैं। इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से लोगों की पहुंच और सुगम बनाना चाहिए।
मध्यप्रदेश का मुरैना जिला का मितावली गांव भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। क्योंकि कहा जाता है कि यहां के 64 योगिनी मंदिर की डिजाइन को लेकर भारत की पुरानी संसद भवन का निर्माण किया गया था। हालांकि इस बात का कोई लिखित या आधिकारिक ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता है। पुराने संद भवन के वा्तुकार सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर थे। मुरैना के इस मंदिर में गोलाकार में चारों तरफ 64 कक्ष बने हैं, जो योगिनियों को समर्पित थे। इस मंदिर को एकादशशत महादेव मंदिर भी कहा जाता है। यह कच्छपघात राजवंश के राजा देवपाल की ओर से 1323 में बनवाया गया था। यह स्थान उस समय तंत्र विश्वविद्यालय था।
मध्यप्रदेश का विदिशा में भी कई स्थल हैं जो काफी चर्चित हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक जाते हैं। यहां के विजय मंदिर उर्फ बीजामंडल का मध्य भारत की हेरिटेज लिस्ट में खास स्थान है। इसी से नई संसद की डिजाइन लेना माना जाता है। इसके भी आधिकारिक प्रमाण नहीं है। इस स्थल का निर्माण चालुक्य राजा कृष्ण के प्रधानमंत्री वाचस्पति ने कराया था। 11वीं सदी का बताया जाता है। यहां पढ़ें विस्तार से
सागर जिले के राहतगढ़ वाटरफॉल जब पूरे वेग में बहता है तो इसकी तुलना नियाग्रा फॉल से की जाती है। यह भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। हालांकि बरसात के दिनों में ही यह ज्यादा उफनता है। जिसे देखने बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यह भोपाल से ढाई घंटे की दूरी पर है, यहां से बड़ी संख्या में पर्यटक बारिश के दिनों में झरने का नजारा लेने पहुंचते हैं।