
भोपाल। राजधानी के चार्टेड अकाउंटेंटों का कहना राजनीतिक दल केवल वोट लेने तक सीमित न रखें उम्मीदवारों को। बाल्कि उनको जनता को क्या परेशानियों का सामना करना पड रहा है और उनकों कैसे दूर किया जा सकता है इस बात की जानकारी होनी चाहिए। यादि जनता ने आप को चुना है तो अपना किया हुआ वादा भी पूरा करना चाहिए। पत्रिका ने जब लोगों से जब इस बारे में बात की तो सब ने अपनी अपनी बाते सब के सामने रखी।
वोट लेने तक सीमित न रहें जनप्रतिनिधि....
प्रोडक्टिविटी में कमी है। कुछ क्षेत्रों में काम तो हो रहा है, लेकिन धरातल पर दिखता नहीं। इंडस्ट्रियल, कमर्शियल ग्रोथ की बातें होती है, लेकिन सरकारें इस ओर काम नहीं करतीं। चार्टर्ड अकाउंटेंट पर काम का बोझ बढ़ गया है। नई सरकार इसे कम करने का रास्ता निकाले, सिर्फ वोट लेना उद्देश्य न हो।
एस. कृष्णन, अध्यक्ष, टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल
प्रोफेशनल्स को पार्टी बनाए अपना प्रत्याशी....
चुनाव में ऐसे लोग जीतकर आएं जो लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें। शहर के हर क्षेत्र में पार्किंग की समस्या है। प्रोफेशनल्स को टिकट दिए जाएं। इससे राजनीति में नयापन आएगा। नहीं तो पुराने ढर्रा चलता रहेगा। विकास के लिए नए लोगों को आगे आना होगा। तभी शहर-प्रदेश और देश तरक्की कर सकेगा।
अभिषेक गुप्ता, चेयरमैन, आइसीएआइ, भोपाल ब्रांच
अतिक्रमण से सड़कें गलियों में हुईं तब्दील....
सरकारें योजनाएं बनाती हैं, लेकिन इन्हें अमल में लाने में बरसों लग जाते हैं। प्रदेश की व्यावसायिक नगरी इंदौर में सड़कें बेहतर हैं, लेकिन राजधानी होने के बाद भी भोपाल की सड़कें अतिक्रमण के कारण गलियों में तब्दील हो गई हैं। नगर निगम टैक्स तो वसूल रहा है, पर काम नहीं किए जाते हैं।
सलिल जैन, पूर्व अध्यक्ष, आइसीएआइ, भोपाल ब्रांच
जनहित के कार्यों को दी जाए प्राथमिकता....
चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है, हम सरकार का चयन इस उम्मीद से करते हैं कि जनहित के कार्य समय पर पूरे होंगे। विकास कार्यों में धन की महती भूमिका है इसलिए इसका उचित उपयोग जरूरी है। इसमें सीए और एडवोकेट की अहम भूमिका को नाकारा नहीं जा सकता है। जनप्रतिनिधि योग्य होना चाहिए।
राजेश जैन, उपाध्यक्ष, टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल
योजनाओं से रूबरू कराने बने हेल्प डेस्क....
सरकार व्यापारियों के लिए योजनाएं लाती है, पर इनकी सटीक जानकारी नहीं मिल पाती है। जनप्रतिनिधियों को व्यापारियों की समस्याओं की ओर ध्यान देना चाहिए। सरकार हेल्प डेस्क बनाए, जिससे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान हो सके। टैक्स अदाएगी की प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए।
पीयूष चतर, चार्टर्ड एकाउंटेंट
नियमों में बार-बार न किया जाए बदलाव...
जो भी सरकार आती है नियमों में परिवर्तन करती है। पिछले कुछ सालों में ऐसा हुआ है। सरकार को दूरगामी निर्णय लेने चाहिए। बार-बार नियमों में बदलाव होने से परेशानी होती है। नतीजतन समय पर काम पूरा नहीं हो पाता और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। आज भी सैकड़ों केस इसी वजह से लंबित हैं।
सुनीता बाहेती, पूर्व अध्यक्ष, आइसीएआइ, भोपाल ब्रांच
सुरक्षा पर ध्यान देने वाले को ही समर्थन....
मौजूदा समय में अपराध बढ़ा है। महिलाओं और ब"ाों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सरकार किसी की भी बने, लेकिन इस मुद्दे पर काम नहीं किया जाता है। जनता को सरकार से अपेक्षा रहती है कि वह कानून व्यवस्था का सही ढंग से पालन करवाए। हम भी इसी उम्मीद से अगली सरकार चुनेंगे।
रचना वाधवानी, चार्टर्ड एकाउंटेंट
व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाए....
बेरोजगारी बड़ा और गंभीर मुद्दा है। सरकार ऐसी योजनाएं अमल में लाए जिससे अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके। जनप्रतिनिधियों में सशक्त निर्णय लेने की क्षमता होना जरूरी है। जीएसटी लागू हुए काफी समय बीत गया है, पर इसमें होने वाली परेशानियों को अभी तक हल नहीं किया गया है। सरकार व्यापारियों पर भी ध्यान दे।
नवनीत गर्ग, सदस्य, आइसीएआइ, भोपाल ब्रांच