
Jabalpur Health- एमपी में सुरक्षित प्रसव के लिए खासा जोर दिया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। इन पर अरबों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं पर जरूरतमंदों को लाभ नहीं मिल रहा। हाल ये है कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में हर साल हजारों गर्भस्थ शिशुओं और गर्भवतियों की मौत हो रही है। प्रदेश की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था के ऐसे ही दो उदाहरण सामने आए। मुरैना में अस्पताल के गेट पर एक ई-रिक्शा में प्रसव हुआ जबकि जबलपुर में तो एक गर्भवती की पहले कोख उजड़ी, फिर उनकी भी सांसे थम गईं। गर्भवती ममता को दर्द से कराहते हुए कीचड़ में दो किमी पैदल चलना पड़ा था।
मुरैना में अस्पताल के गेट पर ई-रिक्शा में प्रसव
मुरैना में जिला अस्पताल के गेट पर प्रसव हुआ। समय पर एंबुलैंस नहीं मिल पाने से यह स्थिति बनी। दर्द होने पर शनिवार को गर्भवती को तुरंत ई रिक्शा से जिला अस्पताल ले जाया गया।
सुबह करीब 10.50 बजे गर्भवती युवती ने ई-रिक्शा में बच्चे को जन्म दिया। एंबुलेंस में देरी होने से परिजन अंजलि ओझा (20) को ई-रिक्शा से अस्पताल लाए थे। प्रसव पीड़ा तेज होने पर नर्सों ने ई-रिक्शा के चारों ओर कपड़े लगाकर सुरक्षित प्रसव कराया।
इधर जबलपुर में तो गर्भस्थ शिशु और गर्भवती की मौत हो गई। एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड (कुदवारी) स्थित ब्रजपुरी कॉलोनी में सड़क व इलाज जैसी सुविधा के अभाव में 22 वर्षीय ममता कुशवाहा और गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई।
परिजनों ने बताया कि शुक्रवार शाम साढ़े सात माह की गर्भवती ममता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। कॉलोनी के कच्चे रास्ते में कीचड़ होने से ऑटो चालकों ने अंदर आने से मना कर दिया। दर्द से कराहती ममता, अपनी जेठानी के सहारे करीब दो किमी पैदल चल मुख्य मार्ग तक पहुंची। वहां से उन्हें ऑटो से लेडी एल्गिन अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने ममता की जांच की और हालत गंभीर देख उसे मेडिकल अस्पताल रेफर कर दिया। वहां पहुंचते ही ममता ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार, पहले गर्भस्थ शिशु की मौत हुई। कुछ मिनट बाद मां की धड़कनें भी थम गईं।