भोपाल

हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने पर मंत्री गोविंद सिंह का बड़ा बयान, 100 करोड़ की संपत्ति छुपाने को बताया गलत

Minister Govind Singh Rajput-मंत्री बोले- झूठी याचिका लगाई, कोर्ट ने कहा- चुनाव याचिका ही विकल्प, मंत्री के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में लगाया था केस
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Aug 02, 2026
मंत्री गोविंद सिंह
मंत्री गोविंद सिंह - Image X

Govind Singh Rajput- मध्यप्रदेश के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने चुनाव में गलत हलफनामा देने और संपत्ति की जानकारी छुपाने के आरोपों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि मैंने कई चुनाव लड़े पर कभी कोई जानकारी नहीं छुपाई। इस संबंध में हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने पर मंत्री गोविंद सिंह ने यह बयान दिया। मप्र हाईकोर्ट जबलपुर ने विधायक व प्रदेश के खाद्य आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ चुनाव में गलत हलफनामा देने और संपत्ति की जानकारी छुपाने के आरोपों पर दायर एक जनहित याचिका खारिज की। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 329(ब) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए हस्तक्षेप से स्पष्ट इंकार कर दिया। बेंच ने साफ कहा कि कानून में इसके लिए चुनाव याचिका ही वैधानिक रास्ता है।

जबलपुर हाईकोर्ट के एसीजे विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत चुनाव संबंधी विवादों में सीधे रिट याचिका पोषणीय नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि चुनावी विवादों के लिए वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

बता दें, सागर की सुरखी सीट से चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी नीरज शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने चुनावी हलफनामे में 100 करोड़ की संपत्ति छिपाई थी।

झूठी याचिका, छवि धूमिल करने का प्रयास: राजपूत

फैसले के बाद मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने मामले पर बयान देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने याचिका को झूठी करार दिया। मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि उन्होंने 7 विधानसभा चुनाव लड़े हैं और कभी भी कोई जानकारी नहीं छिपाई। यह याचिका छवि धूमिल कर सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए की गई।

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा, पहले भी हाईकोर्ट ने ऐसी ही एक याचिका खारिज की थी। एक पर सुनवाई जारी है। उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया।

चुनावी हलफनामे में संपत्ति संबंधी गलत जानकारी देने के आरोप

प्रतिवादी पक्ष ने हाईकोर्ट में दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 329(ब) के तहत चुनाव परिणाम को केवल विधि द्वारा निर्धारित चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। अधिनियम की धारा 80 और 81 के अनुसार चुनाव याचिका निर्धारित समय-सीमा में दायर किया जाना आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने कहा, चुनावी याचिका ही वैधानिक उपाय

याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब वैधानिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं, तब चुनाव आयोग को याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर निर्णय लेने के निर्देश नहीं दिए जा सकते। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका ही विकल्प है।

Updated on:
02 Aug 2026 07:30 am
Published on:
02 Aug 2026 07:29 am