कर्मचारी लगातार अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए सरकार का विरोध कर रहे हैं...
भोपाल।मध्य प्रदेश की सरकार इन दिनों मुश्किल में फंसी हुई है। एक ओर जहां कर्मचारी लगातार अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए सरकार का विरोध कर रहे हैं। वहीं राज्य के मंत्री लाल सिंह आर्य और मुंगावली के नवनिर्वाचित विधायक ब्रिजेंद्र सिंह यादव भी अब मुश्किल में पड़ सकते हैं।
आर्य और यादव का ये है मामला...
दोनों ही नेताओं के खिलाफ ग्वालियर की जिला अदालत में एक परिवाद पत्र अमित गोयल के द्वारा पेश किया गया है। जिसमें एससीएसटी एक्ट और आईटी के तहत मामला दर्ज कराने के लिए कोर्ट से गुहार लगाई गयी है।
याचिका में कहा गया है कि मुंगावली उपचुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ब्रिजेंद्र सिंह यादव ने एक समाज विशेष के लोगों को जातिगत गालियां वॉट्सअप और फेसबुक पर दी है।
वहीं उन गालियों को वोट बैंक के रूप में केश करने के लिए सरकार के मंत्री लाल सिंह आर्य ने वॉट्सअप और फेसबुक ग्रुप पर उन्हें शेयर किया है। साथ ही अमित गोयल को भी पोस्ट की है।
अमित गोयल के द्वारा कहा गया है कि इस पोस्ट दो सुमदाय के बीच तनाव का माहौल पैदा हुआ है, ऐसे में लाल सिंह के खिलाफ आईटी एक्ट और ब्रिजेंद्र सिंह यादव के खिलाफ एससीएसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए।
जिसके बाद कोर्ट ने परिवाद पत्र को स्वीकार कर लिया है, साथ ही इस मामले की अगली सुनवाई अब पांच मार्च होगी।
सरकार की मुश्किल की ये है वजह...
मध्यप्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने पिछले दिनों से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। जानकारों की माने तो इसके अलावा अतिथि शिक्षक भी अपनी मांगों के चलते लगातार आंदोलन करते रहे हैं। इनके अलावा आगनवाड़ी कार्यकर्ता,संविदा कर्मचारी,108 के कर्मचारी सहित असंतुष्ट किसान व संविलियन का इंतजार कर रहे अध्यापक मुख्य रूप से सरकार के लिए परेशानी की वजह बने हुए हैं।
दरअसल संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले 19 फरवरी को प्रदेश के स्वास्थ्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहे। जिनकी मांगे अब तक पूरी नहीं हुई हैं। इस दौरान कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो गई। इसका असर स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय कार्यक्रमों, चिकित्सकीय कार्य, दवाई वितरण व लैब के कार्यों पर पड़ा।
वहीं संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मप्र के प्रांताध्यक्ष सौरभ सिंह चौहान का कहना था कि इस संबंध में वे पहले ही मुख्यमंत्री/मंत्री/विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन देकर अवगत करा चुके है।
इस बार सरकार से आर-पार की लड़ाई है। हर बार सरकार कर्मचारियों को आश्वासन देती हुई आई है, लेकिन इस बार आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब कर सरकार हमारी मांगे नही मान लेती तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा।
कर्मचारियों की मांग है कि एनएचएम ,अन्य परियोजनाओं,स्वास्थ्य में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण/संविलियन और सेवा से निष्कासित कर्मचारियों की बहाली की जाए। ।
ऐसा हुआ आंदोलन ...
-19 फ़रवरी 2018 से गुना में जुटे हजारों संविदा कर्मचारी।
-20 को मनाया काला दिवस।
-संविदा स्वास्थ्य की हड़ताल में प्रदेश के 22 संविदा संगठन/विभाग के कर्मचारी दिनांक 26 फ़रवरी से शामिल हुए।
-28 फ़रवरी को भोपाल में समस्त विभाग के साथ संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के तहत विशाल आंदोलन हुआ।
- 1 मार्च को फिर भोपाल में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ ही 108 के कर्मचारी भी एक बार फिर हड़ताल उतर आए हैं, इन्होंने भी जेपी हॉस्पिटल में प्रदर्शन किया।
ऐसे में जानकारों का मानना है जहां इन सब के चलते सरकार अब खतरे में यानि अगले चुनावों को लेकर मुश्किलों में पड़ी गई है। क्योंकि यदि ये मामले जल्द नहीं सुलझते तो इसका सीधा खामियाजा भाजपा सरकार को भुगतना होगा जबकि इसका सीधा लाभ कांग्रेस का मिलना निश्चित दिखता है। कुल मिलाकर अभी तक ये सारा मामला थमा नहीं है, जो सरकार को मुश्किल से बाहर निकाल सके।
इसके अलावा 28 फरवरी को ही जम्बूरी मैदान में संविदा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया। वहीं शाहजानी पार्क में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठीं। जिनकी मांगे अब तक पूरी नहीं हुई हैं।