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सुप्रीम कोर्ट ही कांग्रेस की आखिरी उम्मीद, 5 सवालों में उलझा मीनाक्षी नटराजन केस

Meenakshi Natarajan-मीनाक्षी नटराजन केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, कई विकल्पों पर​ टिकी कांग्रेस की उम्मीदें

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Supreme Court is the last hope for Congress and Meenakshi Natarajan

Meenakshi Natarajan (Photo- IANS)

Meenakshi Natarajan Case- मध्यप्रदेश को राज्यसभा के तीन नए सांसद मिल गए हैं। तीनों ही बीजेपी के हैं। गुरुवार को पार्टी के तीनों प्रत्याशियों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। रिटर्निंग अधिकारी ने तीनों को जीत के प्रमाणपत्र भी दे दिए। राज्यसभा की सीट पर तीन नए सांसद मिलने और इनमें से एक कांग्रेस की सीट छीनने पर भी बीजेपी ने सार्वजनिक रूप से उत्साह जाहिर नहीं किया। हाईकमान के निर्देश पर इस केस में सुप्रीम कोर्ट के रुख का इंतजार किया जा रहा है। बीजेपी के लिए अभी भी आशंका के बादल घिरे हैं। इधर कांग्रेस की आखिरी आस अब सुप्रीम कोर्ट पर ही टिकी हुई है। कोर्ट के सामने अनेक विकल्प हैं जिनपर मीनाक्षी नटराजन Meenakshi Natarajan का राजनैति​क भविष्य टिका हुआ है।

राज्यसभा चुनाव के लिए नाम वापसी का समय गुरुवार को दोपहर 3 बजे खत्म हो गया। इसके 6 मिनट बाद भाजपा के निर्विरोध निर्वाचित तीनों प्रत्याशी तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल, महेश केवट दोपहर 3.07 बजे रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के कार्यालय में पहुंचे। उन्हें शर्मा ने प्रमाण-पत्र दिया।

14 मिनट में प्रमाण-पत्र ले मौन साधे निकले सांसद

इस प्रकार महज 14 मिनट में दोपहर 3.20 बजे प्रक्रिया पूरी कर तीनों नवनिर्वाचित सांसद विधानसभा से बाहर निकल गए।
निर्वाचित राज्यसभा सांसद तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट ने मीडिया से भी बातचीत नहीं की। इस जीत पर भाजपा ने जश्न भी नहीं मनाया। तीनों प्रत्याशी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आवास पर पहुंचे। यहां खंडेलवाल ने नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को जीत की बधाई देते हुए लड्डू खिलाया।

सुप्रीम कोर्ट से ही कांग्रेस को उम्मीद

कांग्रेस को अब केवल सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है। केस में आज सुनवाई निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट के रुख पर ही मीनाक्षी नटराजन का राजनैतिक भविष्य टिक गया है। सीनियर एडवोकेट पुनीत वर्मा बताते हैं कि देश की शीर्ष कोर्ट के समक्ष अनेक विकल्प हैं—

  1. रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला प्रथम दृष्टया गलत मानने पर राज्यसभा चुनाव परिणाम या आगे की प्रक्रिया पर अंतरिम निर्देश दिया जा सकता है।
  2. कांग्रेस का पक्ष उचित मानने पर देश की शीर्ष कोर्ट आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर आगे सुनवाई नियत कर सकता है।
  3. सुप्रीम कोर्ट, रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने का फैसला सही भी मान सकता है। ऐसे में राज्यसभा के एमपी के तीनों नवविर्वाचित बीजेपी सांसद निर्विरोध विजेता माने जाएंगे।
  4. ज्यादा जरूरी नहीं लगने पर सुप्रीम कोर्ट, याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप करने की बजाए नियमित सुनवाई करने की बात भी कह सकती है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव की मौजूदा प्रक्रिया यथावत जारी रहेगी।
  5. कांग्रेस प्रत्याशी को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका लगाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के सामने उपरोक्त के अलावा और भी अनेक विकल्प हैं। मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में फैसला आने पर एमपी की तीनों राज्यसभा सीटों का चुनाव भी निरस्त किया जा सकता है। इससे उलट, शीर्ष कोर्ट ने यदि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला सही माना तो मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ जाएंगी। मामले में कानूनी विकल्प लगभग खत्म हो जाएंगे।