
MP Youth Mission- मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल की आधे से ज्यादा अवधि पार कर ली है। पत्रिका ने सवाल किया कि शेष अवधि के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य क्या लेकर चल रहे हैं? तो डॉ. मोहन यादव ने कहा, मेरा यूथ मेरा मिशन। यूथ से ज्यादा से ज्यादा संवाद। उनकी समस्याओं पर बात। रोजगार के ठोस उपायों पर काम। रोजगार आधारित शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष फोकस के साथ आगे बढ़ेगी सरकार। हम केवल घोषणाओं की सरकार नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम देने वाली सरकार बनना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि कृषि से भी युवा जुड़ें, उद्योग सिर्फ रोजगार ही नहीं दें, कौशल बढ़ाने के लिए युवाओं को ट्रेनिंग भी दें। खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन जैसे हमारे पंपरागत व्यवसायों से भी युवा जुड़ें। नवाचारों के साथ, नई तकनीकों के साथ ऐसे व्यवसायों को बढाएं।
पत्रिका के राज्य संपादक पंकज श्रीवास्तव से हुई बातचीत के मुख्य अंश…।
A. पिछली समिट ने मप्र को दुनिया के निवेश मानचित्र पर मजबूत किया। अब निवेश को जल्द जमीन पर उतारकर रोजगार पैदा करने का लक्ष्य है। नई औद्योगिक नीतियां, कनेक्टिविटी, सेक्टर-विशेष पार्क, सिंगल-विंडो सिस्टम निवेशकों को सुविधाएं दे रही हैं। अब तक 34 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले, 10 लाख करोड़+ के निवेश जमीन पर उतरे हैं।
A.केवल निवेश प्रस्ताव का बड़ा आंकड़ा पर्याप्त नहीं है। हमारी असली कसौटी है कि कितना निवेश जमीन पर आया। कितने को रोजगार मिला। अब निवेश नीति में रोजगार सृजन के लिए अलग से इंसेंटिव का प्रावधान किया है। हम यह भी चाहते हैं कि एमएसएमई, स्टार्टअप, सर्विस सेक्टर, आईटी, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी लाखों अवसर पैदा हों। यही निवेश को रोजगार में बदलने का हमारा मॉडल है।
A.बहुत अच्छा अनुभव रहा। हम निर्णय कितने ही अच्छे करें, लेकिन जमीन पर उसका असर जानने का इससे अच्छा कोई तरीका नहीं है। सरल पोर्टल.. पर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज हो रही है। शिकायतें दूर करने वाले जिम्मेदार क्या कर रहे हैं। लापरवाही पकड़ में आ रही है। सिर्फ 3-4 दौरों के बाद ही जो काम हुआ है, उसके आंकड़े आप देख सकते हैं। लंबित शिकायतें पहले 8.50 लाख थीं, वह घटकर 4 लाख से भी कम रह गईं। लंबित आवेदन 10 लाख से घटकर 2.50 लाख रह गए। असर तो है। जनविश्वास का आने वाले समय में स्वरूप और बदलेगा। यदि जनता के काम में अड़ंगे लगाए तो जवाबदेही तय होगी।
A.हम जल्दबाजी में कदम नहीं उठाना चाहते। चाहते हैं यूसीसी संवैधानिक प्रक्रिया व कानूनी मजबूती के साथ लागू हो। हमने अपना काम कर दिया। उम्मीद है, जल्द राज्यपाल व राष्ट्रपति से मंजूरी मिलेगी।
A.(चिरपरिचित हंसी में) उम्मीद पर दुनिया कायम है। होगा और जरूर होगा बदलाव। बस कब होगा और क्या होगा, ये सब नहीं बता सकते। किसी भी बदलाव का निर्णय संगठन, प्रशासनिक आवश्यकता और प्रदर्शन को ध्यान में रखकर ही होगा।
A. प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन राजनीतिक नक्शा बदलने का विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध लोगों की सुविधा, प्रशासन की पहुंच और विकास की गति से है। इसलिए आयोग बनाया, ताकि व्यापक अध्ययन और जनता की जरूरतों के आधार पर निर्णय हो। हम जनगणना तक और रुकना चाहते हैं। नए आंकड़ों के साथ और सटीक फैसले ले पाएंगे।
A. युवाओं से संवाद ने मुझे एक बात बहुत स्पष्ट रूप से बताई है कि हमारा युवा अवसर चाहता है। वह सरकार से केवल सहायता नहीं, अवसर और मंच चाहता है। नौकरी के साथ अपना व्यवसाय, स्टार्टअप, खेती में नई तकनीक और दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर चाहता है। मैं कई बार शिक्षक की भूमिका में स्कूलों में जाता हूं। ऐसा इसलिए कि मेरा मानना है कि मुख्यमंत्री केवल फाइलों से प्रदेश बेहतर ढंग से नहीं चला सकता। कक्षा में जाकर छात्र की आंखों में देखना और समस्या समझना असली संवाद है। इन संवादों से नीतियों को और बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।
A.चुनौतियां तो वहां रही हैं। पहले बालाघाट के अंदर के क्षेत्रों में कोई जाता ही नहीं था। अब जब हम जा रहे हैं तो समस्याएं सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य, रोजगार, स्कूल-कॉलेज, व्यापार-व्यावसाय सभी की समस्याएं हैं। स्वास्थ्य मंत्री वहां जाकर आए। मैं भी जाऊंगा। समस्याएं दूर करने की कोशिश करेंगे। जहां लापरवाही सामने आई है, वहां जिम्मेदारी तय करने में सरकार ने कोई संकोच नहीं किया है। बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
A.हमने किसानों के सामने एक बात जरूर रखी थी कि मूंग की जगह उड़द लगाओ, मोटा अनाज उगाओ। केंद्र भी ज्यादा मूंग नहीं लेती। किसानों को नाराजगी थी तो हमने उनकी बात मानी, अतिरिक्त खरीदी की। यह सीख है कि किसान और विभाग के बीच संवाद लगातार और स्पष्ट होना चाहिए। किसान को उचित मूल्य मिले और पर उपभोक्ता को सुरक्षित खाद्य पदार्थ भी। दोनों बातें साथ चलनी चाहिए।
A.लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन के पहले हम शगुन दे चुके हैं। आगे भी कोई कसर नहीं छूटेगी। इस वादे पर सरकार अटल है। बहनों के आर्थिक सशक्तीकरण का वादा है हमारा। उन्हें रोजगार से भी जोडऩा है। हम चाहते हैं कि यह पर्व बहनों के लिए सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती का संदेश लेकर आए। बहनों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही हमारे लिए सबसे बड़ा उपहार है।