
एमपी में सांपों पर सबसे बड़ा सर्वे कर रही WII- फोटो सोर्स : AI Grok
MP Snake Survey : मध्यप्रदेश में ‘जहरीले सांपों की गिनती’ की गिनती की जा रही है। राज्य के 5 इलाकों में कोबरा, करैत जैसे खतरनाक सांपों के बिल ढूंढे जा रहे हैं। वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (WII) देहरादून के तत्वावधान में यह काम किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का वन विभाग भी इसमें सहयोग कर रहा है। WII और वन विभाग के अधिकारी "स्नेक सेंसस" की बजाए इसे सांपों का सर्वे बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह सांपों की पारंपरिक गणना नहीं है बल्कि उनकी अलग-अलग प्रजातियों, मौजूदगी, संख्या के रुझान और प्राकृतिक व्यवहार को समझने का वैज्ञानिक प्रयास है। इसे सांपों के संबंध में देश का सबसे बड़ा सर्वे बताया जा रहा है। सर्वे के लिए मार्च में वर्कशाप आयोजित की गई। इसके बाद बाकायदा ट्रेनिंग दी गई और सर्वे शुरु कर दिया गया।
WII देहरादून के अधिकारी और साइंटिस्ट यह कठिन स्टडी कर रहे हैं। यह सर्वे उस समय हो रहा है जब प्रदेश में सांप के काटने से होने वाली मौतों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। स्टडी मार्च-अप्रैल 2026 में शुरू हुई और इसके 2027 के आखिर तक चलने की उम्मीद है।
सांपों की यह स्टडी, भारत की ऐसी पहली व्यवस्थित वैज्ञानिक स्टडी बताई जा रही है। इस प्रक्रिया को आमतौर पर "सांपों की गिनती" (snake census) कहा जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (WII), देहरादून और राज्य का वन विभाग, प्रदेश के सभी 55 ज़िलों में हर सांप को गिनने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय शोधकर्ता यह स्टडी कर रहे हैं कि चुने हुए संरक्षित इलाकों में कौन-कौन सी सांपों की प्रजातियां पाई जाती हैं, वे कहां मिलती हैं, हर प्रजाति कितनी आम है और वे अपने रहने की जगहों (हैबिटैट) का इस्तेमाल कैसे करती हैं। ज़हरीले सांपों पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
इससे पहले उत्तराखंड के कुछ वन डिवीजनों में सांपों पर स्टडी की गई थी। कुछ दक्षिणी राज्यों में सरीसृपों (reptiles) और उभयचरों (amphibians) को कवर करने वाले हर्पेटोलॉजिकल सर्वे भी किए गए थे। लेकिन यह पहली बार है जब भारत में इस तरह की बड़े पैमाने पर सांपों पर केंद्रित स्टडी की जा रही है।
यह स्टडी सांपों की विविधता, आबादी की स्थिति और उनके रहने की जगह (स्पेशियल इकोलॉजी) की जांच करेगी, जिसमें ज़हरीली प्रजातियों पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसमें मध्यप्रदेश में 'बिग फोर' ज़हरीले सांपों के रहने के इलाकों (होम रेंज) की भी स्टडी की जाएगी और बचाए गए सांपों को छोड़ने के लिए सही जगहों की पहचान की जाएगी। इसका बड़ा मकसद ऐसी शुरुआती जानकारी तैयार करना है जिसका इस्तेमाल भविष्य के सर्वे और रहने की जगह के मैनेजमेंट, वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग, संरक्षण प्लानिंग और पब्लिक-सेफ्टी से जुड़े कामों में किया जा सके।
एमपी के पांच संरक्षित वन क्षेत्रों में डिटेल्ड स्टडी की जा रही है। इनमें तीन टाइगर रिज़र्व शामिल हैं। इस स्टडी में कान्हा टाइगर रिज़र्व, सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व, पन्ना टाइगर रिज़र्व के साथ मंदसौर में गांधी सागर वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी और अमरकंटक का इलाका शामिल किया गया है। इन जगहों को अलग-अलग इकोलॉजिकल माहौल को दिखाने के लिए चुना गया था, जिनमें घास के मैदान, जंगल और पानी की अधिकता वाले इलाके शामिल हैं।
मार्च-अप्रैल 2026: स्टडी शुरू हुई। अप्रैल में दो दिन की वर्कशॉप में 100 से ज़्यादा वन कर्मियों को ट्रेनिंग दी गई।
जुलाई-अगस्त 2026: पहले चरण ने तेज़ी पकड़ी। यह जुलाई-अक्टूबर की उस अवधि का हिस्सा है जब आमतौर पर सांपों की हलचल, सांप के काटने की घटनाएं और उनसे होने वाली मौतें सबसे ज़्यादा होती हैं।
2026-27: रिसर्चर और वन कर्मचारी चुने गए पांच इलाकों और अलग-अलग मौसमों में जानकारी इकट्ठा करना जारी रखेंगे।
2027 के आखिर तक: प्रोजेक्ट के पूरा होने की उम्मीद है, जिससे ऐसी शुरुआती जानकारी (बेसलाइन जानकारी) मिलेगी जिसका इस्तेमाल भविष्य के सर्वे, संरक्षण और पब्लिक हेल्थ प्लानिंग के लिए किया जा सकेगा।
Updated on:
28 Aug 2026 11:24 am
Published on:
28 Aug 2026 11:23 am
