
MP Cabinet Ministers Controversy- भले ही कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान व राज्य मंत्री लखन पटेल के विभाग ले लिए गए हों, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री विजय शाह व कैलाश विजयवर्गीय सहित 7 अन्य पर कोई एक्शन नहीं हुआ। जबकि इन मंत्रियों से जुड़े विवादों ने कई मौकों पर मध्यप्रदेश की किरकिरी कराई। ऐसी नौबत ला दी कि सत्ता व संगठन को जवाब तक देने पड़े। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च न्यायिक संस्थाओं को दखल देना पड़ा। तब भी यह मंत्री सरकार में बने हुए हैं।
एमपी के जनजातीय कार्य मंत्री शाह का नाम सबसे अधिक विवादों में रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद 12 मई 2025 को इंदौर के रायकुंडा में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इसका देशभर में विरोध हुआ। हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। यह प्रकरण अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। शाह पहले भी वे एक वरिष्ठ नेता की पत्नी पर टिप्पणी कर मंत्री पद गंवा चुके थे।
नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विवादित बयानों के चलते कई बार आलोचना झेल चुके। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जलकांड में मौतों पर पत्रकारों के सवाल पर अमर्यादित शब्द कहे थे। जिसके बाद खूब किरकिरी हुई। इंदौर में ऑस्ट्रेलियाई महिला खिलाड़ी के साथ यौन हिंसा के बाद उनका बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा।
संपतिया उइके (फोटो सोर्स- संपतिया उइके फेसबुक पेज)
मंत्री संपतिया उइके के पीएचई विभाग द्वारा कराए जल जीवन मिशन के कामों में कथाथित घोटालों की गूंज दिल्ली तक पहुंची। यहां तक कि केंद्र ने अपने हिस्से की राशि रोक ली। सदन में भी सरकार को गंभीर आरोप झेलने पड़े।
इंदर सिंह परमार (फोटो सोर्स इंदर सिंह परमार फेसबुक)
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने प्रसिद्ध समाज सुधारक राजा राममोहन राय को नवंबर 2025 में अंग्रेजों का दलाल बताया था। बोले- आजादी के पहले मिशनरी स्कूलों में धर्मांतरण होता था, अंग्रेजों ने कई समाज सुधारक बनाए, उनमें राजा राममोहन राय भी एक थे। हालांकि अपने बयान पर बाद में सार्वजनिक रूप से खेद जताकर माफी मांग चुके हैं।
एदल सिंह कंषाना। फोटो सोर्स -एदल सिंह कंषाना फेसबुक)
कृषि मंत्री कंषाना ने मार्च 2025 में 'रेत माफिया को पेट माफिया बताकर अघोषित रूप से खनिज माफियाओं का समर्थन किया था। इसके कुछ माह बाद ही मुरैना के रतनपुर गांव में अवैध खनिज से भरे वाहन की टक्कर से एक रेंजर की मौत हो गई। घटना के बाद किसानों और स्थानीय लोगों ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
नरेंद्र शिवाजी पटेल। (फोटो सोर्स नरेंद्र शिवाजी पटेल फेसबुक)
राज्य मंत्री पटेल क्षेत्र के एक निजी स्कूल की मान्यता निरस्त करने संबंधी पत्र के वायरल होने और ग्वालियर में एक होटल कर्मियों से तथाकथित कहा-सुनी के बाद चर्चा में आए थे। ये भोपाल पुलिस द्वारा पूर्व में बेटे के खिलाफ की गई एक कार्रवाई पर भारी व्यथित हो गए थे, जिस पर विपक्ष ने सदन के अंदर और बाहर भी सरकार को घेरते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।
मंत्री प्रतिमा बागरी। (फोटो सोर्स प्रतिमा बागरी इंस्टाग्राम)
नगरीय विकास की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र विवाद ताजा है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रदीप अहिरवार की याचिका के बाद वे फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आरोपों से घिरी हैं। उनके मुंह बोले भाई की गांजा तस्करी मामले में गिरफ्तारी हुई थी। यही नहीं, उन्होंने कंडम घोषित की जा चुकी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल दागकर सरकार की किरकिरी भी कराई थी।