
MP Congress- मध्यप्रदेश में कांग्रेस में अंदरूनी उठापटक जारी है। अनुशासन तो मानो बचा ही नहीं है। कांग्रेस के तीन दिवसीय मौन सत्याग्रह की कुछ नेताओं ने पहले ही दिन हवा निकाल दी। कई शहरों में पार्टी नेताओं ने टीवी डिबेट में भाग लिया। विदिशा में तो खुद जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी ही डिबेट में शामिल हुए। इस पर पार्टी नेताओं ने आपत्ति भी जताई। मनाही के बावजूद टीवी डिबेट में शामिल होने की शिकायतों पर प्रदेश नेतृत्व ने भी नाराजगी जताई है। संगठन की तरफ से नोटिस जारी करने की बात कही गई है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर प्रदेश संगठन प्रभारी महासचिव डॉ संजय कामले ने बुधवार को मौन सत्याग्रह के संबंध में निर्देश जारी किए थे। इसके अंतर्गत कहा गया था कि सत्याग्रह अवधि में अधिकृत पत्रकार वार्ताओं को छोड़कर, मप्र कांग्रेस का कोई भी अधिकृत नेता, प्रवक्ता अथवा प्रतिनिधि किसी भी टीवी डिबेट में भाग नहीं लेगा, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोई व्यक्तिगत आधिकारिक वक्तव्य नहीं देगा। लेकिन कई नेताओं ने इन निर्देशों को हवा में उड़ा दिया।
भोपाल में मोनू सक्सेना और इंदौर में राजेश यादव ने पार्टी के अनुशासन को तोड़ा। विदिशा में तो गुरुवार को जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी टीवी डिबेट में शामिल हुए। इस पर पार्टी में खासा बवाल मच गया।
कांग्रेस की महिला उत्पीडऩ प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रियंका किरार ने विदिशा जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी के टीवी डिबेट में शामिल
होने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने पूछा है कि क्या पार्टी जिलाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करेगी!
प्रदेश संगठन ने अनुशासनहीनता की शिकायत को गंभीरता से लिया। इस पर नोटिस देने की भी बात कही हालांकि देर रात तक किसी भी नेता के खिलाफ कोई नोटिस जारी नहीं हुआ।
इस बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार पर फिर तीखे प्रहार किए। गुरुवार को उन्होंने नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उज्जैन के वीर भारत न्यास को एक रुपए में करोड़ों की जमीन देने और अन्य भूमि विवाद के मुद्दों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाने की बात बताई।
पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने कहा कि हमने इन मामलों को प्रमुखता से उठाने का फैसला लिया है। कांग्रेस अब उज्जैन से अयोध्या तक कथित लूट के मुद्दे पर संभागस्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। 15 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में भी सरकार से जवाब मांगेंगे। कांग्रेस एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू कर रही है जिसपर लोग, भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज और सबूत अपलोड कर सकेंगे।