भोपाल

Sagar liquor tragedy: कफ सिरप कांड से नहीं चेता FDA, सैंपलिंग होती तो शायद बच जाती जानें !

Sagar liquor tragedy: मप्र के एफडीए पर छिंदवाड़ा में अमानक कफ सिरप और सागर की जहरीली शराब त्रासदी रोकने में नाकामी के आरोप लगे हैं।
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Updated: 10 Sep 2026, 10:30 AM IST
जहरीली शराब को लेकर कठघरे में एफडीए, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
जहरीली शराब को लेकर कठघरे में एफडीए, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Bhopal news: एमपी के छिंदवाड़ा में अमानक कफ सिरप एप की बिक्री रुकवाने में फेल मप्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग अब जहरीली शराब को लेकर भी कठघरे में है। सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों में नाकाम तंत्र में अब एफडीए को भी जोड़ा जा रहा है। दरअसल, कुछ माह पूर्व ही महाराष्ट्र में एफडीए ने प्रदेश में बिकने वाली एक नामी शराब ब्रांड को अमानक पाते हुए प्रतिबंधित कर दिया था। पूरे देश में फूड सेफ्टी के एक जैसे ही स्टैंडर्ड हैं, सवाल यह उठता है कि जब महाराष्ट्र में एक्शन हो सकता है तो मप्र का एफडीए उदासीन क्यों है, जबकि शराब भी फूड श्रेणी में है। सूत्रों के अनुसार, मप्र में एफडीए शराब को आबकारी विभाग तक ही सीमित रखता है, जिस कारण न तो दुकानों में जांच होती न सैम्पलिंग की जाती है।

महाराष्ट्र से सबक लें प्रदेश के अफसर

मप्र एफडीए को महाराष्ट्र के एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे के मॉडल से सबक लेना चाहिए। बता दें, महाराष्ट्र एफडीए की बीते एक साल में मिलावटखोरों के खिलाफ सख्ती ने पूरे देश में लोगों का ध्यान खींचा है। इस बीच मप्र में लगातार खानपान की वस्तुओं में मिलावट और उससे बड़ी घटनाएं सामने आने पर लोग प्रदेश में भी महाराष्ट्र एफडीए की तरह सख्त एक्शन की दरकार कर रहे हैं।

कमलनाथ सरकार ने लगाया था रासुका

कांग्रेस की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने जुलाई 2019 में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान छेड़कर 40 से अधिक मिलावटखोरों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई कराई थी। 106 के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थे। तब मिलावटखोरों में हड़कंप मचा था।

ऐसे फेल हो रहा एमपी का एफडीए

केस-1: छिंदवाड़ा में नकली कफ सिरप लोगों तक पहुंची

अक्टूबर 2025 में कोल्डड्रिफ नामक सिरप से बच्चों की मौत होना सामने आया। जांच में पता चला कि सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 48.6 फीसद है, जो कि स्टैंडर्ड से अधिक थी और जानलेवा बन गई। यदि सिरप के सैंपल की जांच होती तो बाजार में जाने से पहले रोक सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। आनन-फानन में एफडीए के उस समय के प्रभारी नियंत्रक रहे आइएएस दिनेश मौर्य को हटा दिया गया।

केस-2: सागर में गांव-गांव बिकी नकली शराब

6 सितंबर को सागर में 11 लोगों की मौत की घटना सामने आई। सभी की तबीयत सागर गोल्ड नामक ब्रांड की शराब पीने से होना सामने आया। मृतकों की संख्या 30 के पार हो चुकी है। एफडीए के अफसरों की सागर में भी तैनाती है। विभाग यदि शराब की भी सैम्पलिंग या जांच कराता तो शायद इस बड़ी त्रासदी को भी समय रहते रोका जा सकता था।

इसलिए एफडीए नाकाम

1- खाद्यव व पेय पदार्थों की जांच करने का जिम्मा है। पेय पदार्थों में शराब के सैंपल लेने का अधिकार है, जांच = कराई जा सकती थी। आबकारी लाख मना करे या आपत्ति दर्ज करे लेकिन एफडीए ऐसा विभाग है जो चाहे तो किसी भी फैक्ट्री पर ताले लगवा सकता था लेकिन अफसर हिम्मत ही नहीं कर रहे।

2- एफडीए ने पूर्व में बालाघाट, भोपाल व सतना समेत कुछ जिलों में बियर समेत अन्य ब्रांड के सैंपल लिए थे। जब बियर के सैंपल लिए तो नकली शराब के सैंपल क्यों नहीं लिए गए।

3-जब छिंदवाड़ा में सिरप के पीने से 3. बच्चों की मौत हुई, तब भी एफडीए के अफसर सचेत नहीं हुए। इस पर वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप भी नहीं किया।

ये 3 आइएएस, जिनका एफडीए पर नियंत्रण

वर्तमान में आइएएस मनोज पुष्प नियंत्रक हैं। यह लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन आता है, जिसका प्रभार प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह के पास है। जबकि विभाग के कमिश्नर धनराजू एस हैं। असल में कमिश्नर फूड प्रोसेसिंग का पद हमेशा से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के एसीएस या पीएस के पास रहा है। मनोज पुष्प से पहले 2024 में एफडीए में एफडीए की कमान आइएएस मयंक अग्रवाल, 2020-21 में पी नरहरि व छिंदवाड़ा सिरप कांड के समय आइएएस दिनेश मौर्य के पास थी। चर्चा है कि यह आर्थिक दृष्टि से काफी बड़ा माना जाता है।

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10 Sep 2026, 10:30 AM IST
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