
Bhopal News : आपने कभी अंतरिक्ष में गूंजने वाली रहस्यमयी आवाजों को नहीं सुना होगा या चंद्रमा और मंगल की ऊबड़-खाबड़ सतहों पर चलने का अहसास भी नहीं किया होगा। अब इन रोमांचक अनुभवों के लिए आपको इसरो या नासा जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अंतरिक्ष का एक छोटा सा टुकड़ा जमीन पर उतर आया है। रीजनल साइंस सेंटर में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक 'हॉल ऑफ स्पेस एक्सप्लोरेशन' गैलरी का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया।
एक करोड़ रुपए की लागत से तैयार गैलरी में सिर्फ आधुनिक मशीनें ही नहीं हैं, बल्कि यह भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा की सजीव गाथा है। 17 साल पुरानी ऊर्जा गैलरी की जगह 4,000 वर्ग फीट के डिजिटल स्पेस हब बनाया गया है। यहां भारत की खगोलीय ज्ञान परंपरा से लेकर आर्यभट्ट, चंद्रयान और आगामी गगनयान मिशन तक के सफर को रोचक ढंग से प्रदर्शित किया गया है।
इस गैलरी की सबसे बड़ी खासियत इसका इंटरैक्टिव होना है। यहां आने वाले विद्यार्थी और विज्ञान प्रेमी न केवल ग्रहों और ब्लैक होल के बारे में पढ़ सकेंगे, बल्कि 'फ्लाइट सिमुलेटर' के जरिए खुद अंतरिक्ष यान उड़ाने और 'स्पेस वॉक' का थ्री-डी वर्चुअल अनुभव भी ले सकेंगे।
-तकनीक का अनूठा संगम
गैलरी को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए इसमें 4 स्पेशल डिजिटल जोन और 15 इंटरैक्टिव वर्किंग मॉडल लगाए गए हैं, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति और ग्रहों की गति को आसानी से समझाते हैं।
-18 साल बाद बड़ा बदलाव
सेंटर के जिस हिस्से में 18 साल पहले ऊर्जा गैलरी बनाई गई थी, उसी स्थान को अब नई सोच और आधुनिक तकनीक के साथ 'हॉल ऑफ स्पेस एक्सप्लोरेशन' का रूप दिया गया है।
-स्पेस साउंड का अनोखा अनुभव
इस गैलरी में 'साउंड इन स्पेस' फीचर जोड़ा गया है। विशेष साउंड इफेक्ट्स और ऑडियो-वीडियो प्रोजेक्शन के जरिए दर्शक महसूस कर सकेंगे कि, वास्तव में अंतरिक्ष में कैसी आवाजें गूंजती हैं।
-राष्ट्रीय स्तर का सहयोग
इस अत्याधुनिक गैलरी का निर्माण राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद द्वारा किया गया है, जिसमें तकनीकी सहयोग के लिए मुंबई के प्रसिद्ध नेहरू विज्ञान केंद्र ने बड़ी भूमिका निभाई है।